बच्चों में दिखें ये लक्षण, तो हो जाएं सावधान

नई दिल्ली (मानवीय सोच) बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर अक्सर लोग बात करने से हिचकते हैं. लोग समाज, बदनामी के डर से ऐसा करने से डरते हैं. बाल शोषण (child abuse) की बात करें, तो इसकी घटनाएं भारत में लगातार बढ़ रही है. इसके बावजूद लोग सर्तक नहीं रहते, जिससे बच्चों (लड़का या लड़की) को मानासिक व शारीरिक परेशानी से गुजरना पड़ता है.

बच्चों की शारीरिक, मानसिक स्थिति पर पड़ता है प्रभाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. हर दिन कई बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं. बचपन में होने वाली ये वारदातें ताउम्र उनको परेशान करती हैं. ऐसे में अभिभावकों को इसके लिए जागरूक होना चाहिए. बच्चे के व्यवहार या शारीरिक परेशानी को देखकर या समझकर बच्चों से इस बारे में बात करनी चाहिए और इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद करनी चाहिए.

टच व बिना टच किए भी हो सकता है यौन शोषण

बच्चे छोटे होते हैं, इसलिए उनके साथ होने वाले यौन शोषण को अच्छे से समझ नहीं पाते हैं. बच्चों के साथ दो तरह से यौन शोषण हो सकता है. एक संपर्क (टच) में आकर और दूसरा बिना संपर्क (विदआउट टच) में आकर. संपर्क यौन शोषण में बच्चे के साथ शारीरिक संबंध बनाना, गलत जगह छूना, चूमना आदि शामिल होता है. वहीं, बिना संपर्ख में आए भी बच्चों के साथ यौन शोषण होता है, जिसमें अश्लील सामग्री दिखाना आदि शामिल होता है.

इन लक्षणों के दिखने पर हो जाएं अलर्ट

ऐसे में अभिभावकों को खासतौर पर बच्चों की देखभाल करने की जरूरत होती है. बच्चों के व्यवहार, बात या शारीरिक गतिविधियों को देखकर कुछ भी शक हो, तो उनसे बात कर, सच्चाई का पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए. खासकर जब बच्चों के प्राइवेट पार्ट या इसके आसपास दर्द , खुजली या खून बहे. चलने या बैठने में दिक्‍कत हो. भूख कम लगे. सोने में परेशानी हो, गुमशुम या उदास रहे. लोगों से दूरी बनाकर रखे. स्कूल में परफॉर्मेंस खराब हो रही हो. ऐसे संकेत मिलने पर अभिभावकों को तुरंत अलर्ट हो जाना चाहिए.

बच्चे को विश्वास में लेकर करें बात

बच्चों में इन लक्षणों के दिखने पर उनसे आराम से बात करनी चाहिए. उनको विश्वास में लेकर सभी बातों का पता करना चाहिए. समय रहते अगर बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण की घटनाओं को रोका नहीं गया, तो यह आने वाले समय में दर्दनाक हो सकती है और जिंदगी भर के लिए चिंता, अवसाद, क्रोध, तनाव आदि का कारण बन सकती है.

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