लखनऊ: हाई कोर्ट ने जल जीवन मिशन घोटाले की जांच की याचिका खारिज, दी वजह

लखनऊ। जल जीवन मिशन में कथित घोटाले की जांच को लेकर रियल एस्टेट व्यवसायी आदित्य मोहन अरोड़ा की याचिका को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया. इस याचिका में जल जीवन मिशन में कथित घोटाले की जांच कैग या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई थी.

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के कार्यपालक निदेशक पहले ही सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए बिंदुवार स्पष्टीकरण दे चुके हैं, जिसके बाद हमारे पास इस मामले में दखल देने का कोई कारण नहीं है. अरोड़ा की ओर से दायर जनहित याचिका में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के ट्वीट को मुख्य आधार बनाया गया था.

याचिका में कहा गया कि जल जीवन मिशन को चलाने का कार्य राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की जिम्मेदारी है. इस मिशन में तृतीय पक्ष निरीक्षण करवाने के लिए उत्तर प्रदेश जल निगम के स्थान पर एक निजी एजेंसी को चुना गया, जबकि जल निगम राज्य की एजेंसी है। याचिका में यह भी दावा किया गया था कि निजी एजेंसी ने जल निगम की ओर से बेहद महंगे रेट पर थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन का काम किया. याचिका में पाइप सप्लाई को लेकर भी आरोप लगाए गए थे। वहीं, जल एवं स्वच्छता मिशन के अधिवक्ता सुधीर कुमार ने कहा कि यह याचिका आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के ट्वीट के आधार पर दायर की गई है.

वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब कार्यपालक निदेशक पहले ही दे चुके हैं. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव प्रथम की बेंच ने याचिका खारिज कर दी। इसने अपने आदेश में कहा कि अगर इस तरह के काम में कोई अनियमितता या अवैधता पाई जाती है, तो इसकी जांच की जानी चाहिए, लेकिन इस मामले में कार्यकारी निदेशक द्वारा 10 सितंबर 2021 को भेजे गए जवाब में याचिकाकर्ता के सभी भ्रम और चिंताओं को दूर कर दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि एजेंसी का चयन भी नियमानुसार किया गया है और एजेंसी ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान जल निगम से कम रेट कोट किया था.

 

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