सहारनपुर की बेहट सीट पर निर्णायक होते हैं मुस्लिम, जानें क्यों

सहारनपुर (मानवीय सोच) उत्तर प्रदेश में सहारनपुर की बेहट विधानसभा सीट पर मुस्लिमों की भूमिका निर्णायक रहती है। इस सीट पर करीब 53 फीसद मुस्लिम मतदाता हैं। इस बार के चुनाव में भाजपा ने पिछली बार कांग्रेस की ओर से जीते विधायक नरेश सेनी को उम्मीदवार बनाया है जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने उमर अली खान को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

इस सीट से अभी तक पांच बार कांग्रेस विधायक चुने जा चुके हैं। यह जिले की ऐसी अकेली सीट है जहां से तीन बार निर्दलीय विधायक भी जीतने में सफल रहे हैं। 1962 में ठाकुर सरदार सिंह निर्दलीय जीते थे और 1967 में वह भारतीय क्रांति दल के उम्मीदवार के रूप में जीते थे। मुल्कीराज सेनी ने 1969 में  सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। 1974 में कांग्रेस की ओर से हाफीज असलम, 1977 में हाजी शमशाद जनता पार्टी के टिकट पर जीते थे। जबकि 1080 में ठाकुर अमर सिंह ने बतौर निर्दलीय जीत दर्ज की थी।

1985 में कांग्रेस की ओर से असलम खान विजयी हुए थे। खान ने अगला चुनाव 1989 में जनता दल के टिकट पर जीता था। 1991, 1996 और 2002 में जगदीश राणा विजयी हुए थे और 2012 में जगदीश राणा के छोटे भाई महावीर राणा बसपा से चुनाव जीते थे। 1993 में केवल एक बार यह सीट भाजपा के खाते में गई थी। जब रानी देवलता यहां से जीती थीं। बेहट के इतिहास में रानी देवलता यहां से जीती अकेली महिला विधायक रही हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस के नरेश सैनी बसपा को हराकर जीते थे। बेहट विधानसभा सीट पर इस बार 3 लाख 69 हजार 877 मतदाता हैं और 439 बूथ हैं। जबकि 216 मतदान केंद्र हैं।

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