लखनऊ : (मानवीय सोच) ई वाहनों की मांग जेट की रफ्तार से भाग रही है। वर्ष 2020 में केवल 31 हजार ई वाहन बिके थे। वहीं, वर्ष 2023 के 10 महीने में ही 2.25 लाख ई वाहन बिक चुके हैं। इसी तरह हाइब्रिड वाहनों की मांग भी सात हजार से बढ़कर 28 हजार हो गई है। ई वाहनों ने पेट्रोल व एलपीजी के हाइब्रिड वाहनों को जोर का झटका दिया है। तीन साल में इनकी बिक्री दस फीसदी भी नहीं बची है।
महंगे पेट्रोल व डीजल के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों को देखा जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के मुरीद दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद पेट्रोल व डीजल वाहनों की बिक्री पर खास असर नहीं पड़ा है। सीएनजी वाहनों की बिक्री का ग्राफ भी ऊपर चढ़ा है लेकिन एलपीजी और अन्य हाइब्रिड मॉडलों की बिक्री की हिस्सेदारी ई वाहनों ने छीन ली है। वाहन निर्माता कंपनियों के मुताबिक पेट्रोल, डीजल और सीएनजी वाहनों की बिक्री में कोई कमी न आने के बावजूद ई वाहनों की मांग में अप्रत्याशित तेजी से साफ है कि चार पहिया वाहनों का नया तबका बाजार में आ गया है। ये तबका मध्यम वर्गीय है जिसके पास बाइक और स्कूटी है।
