लखनऊ : (मानवीय सोच) ‘लाइफलाइन’ के तौर पर शुरू की गई लखनऊ मेट्रो पिछले पांच साल से जहां की तहां अटकी हुई है। मेट्रो का विस्तार न हो पाने व कई अन्य कारणों से मेट्रो का घाटा बढ़ता जा रहा है और शहर में सुगम यातायात की समस्या दिनोंदिन जटिल होती जा रही है। मेट्रो विस्तार में जहां वित्तीय प्रबंधन रोड़ा बना है, वहीं सपा सरकार द्वारा डीपीआर को मंजूरी देने में हुई चूक को भी एक वजह बताया जा रहा है।
माना जा रहा है कि अगर कानपुर की तरह लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना के भी दोनों कॉरिडोर को एक साथ मंजूरी दे दी गई होती तो पहले कॉरिडोर (रेड लाइन ) का काम समाप्त होने के साथ ही दूसरे कॉरिडोर (ब्लू लाइन) का भी काम शुरू हो गया होता। ऐसा करके मेट्रो सेवा को जहां घाटे से उबारा जा सकता था, वहीं शहर के घनी आबादी वाले लोगों को भी इस सेवा का लाभ मिलता।
