नई दिल्ली (मानवीय सोच) हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक बयान दिया कि यूक्रेन और रूस के युद्ध के बाद वैश्विक भू-राजनीति प्रभावित हो रही है और इसका प्रभाव धरती से बाहर भी देखने को मिलेगा। इस बयान के मायने बड़े हैं क्योंकि धरती से बाहर चांद पर भू-राजनीति का ट्रेंड देखने को मिलेगा। यह सब तब सामने आ रहा है जब विशेषज्ञ काफी समय से इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि अमेरिका और चीन आने वाले दिनों में अंतरिक्ष की दुनिया में और चांद पर एक दूसरे को कड़ी टक्कर देते हुए दिखाई देंगे।
चीन और अमेरिका के होड़ का नया युग
दरअसल, चांद पर मौजूद खनिजों को लेकर चीन और अमेरिका की होड़ पर अपनी एक रिपोर्ट में इंडियन एक्सप्रेस ने ब्लूमबर्ग के हवाले से इस मुद्दे पर बड़ी ही विस्तृत और शोधपूर्ण रिपोर्ट प्रकाशित की है। करीब आधी सदी से भी पहले स्पुतनिक और अपोलो के युग की तरह एक बार फिर दुनिया के बड़े नेता फिर अंतरिक्ष में प्रभुत्व हासिल करने के लिए दौड़ लगाना शुरू कर चुके हैं। हालांकि काफी पहले अमेरिका और सोवियत संघ ने इस पर संयुक्त राष्ट्र में नियमों का एक सेट तैयार किया है लेकिन महाशक्तियों की अगली पीढ़ी अब शायद इससे आगे निकल चुकी हैं।
चांद पर संभावित रूप से सैकड़ों अरबों डॉलर के संसाधन
अंतरिक्ष शोध पर अमेरिका और चीन के बीच होड़ शुरू हो चुकी है और यह चीन के तेजी से उभार के बाद हुआ है। रिपोर्ट में एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि रवांडा और फिलीपींस जैसे उभरते बाजारों के साथ एलन मस्क और जेफ बेजोस जैसे अरबपति डिजिटल और वाणिज्यिक अवसरों का पता लगाने के लिए अधिक से अधिक उपग्रह लॉन्च कर रहे हैं। लेकिन जब अमेरिका और चीन की बात आती है तो दांव और भी अधिक हो जाते हैं। यह वैचारिक विभाजन चंद्रमा और अन्य जगहों पर संभावित रूप से सैकड़ों अरबों डॉलर के संसाधनों को निकालने तक पहुंच जाता है।
दोनों महाशक्तियों के बीच चांद का रोडमैप!
पिछले साल चीन ने जहां अपने स्वदेशी स्पेस स्टेशन के लिए पहला मॉड्यूल रवाना किया था। चीन इस स्टेशन के जरिए अंतरिक्ष में अमेरिकी बादशाहत को चुनौती देना चाहता है। इतना ही नहीं चीन ने बीते एक दशक में चंद्रमा पर चार बार से अधिक सफलतापूर्वर लैंडिंग कर अपना परचम फहराया है। उधर अमेरिका इकलौता ऐसा देश है जिसने चांद पर इंसान को उतारा है। हालांकि ऐसा नहीं है कि केवल चीन ही चांद पर इंसानों को भेजना चाहता है, बल्कि इस दौड़ में अमेरिका, रूस, भारत कनाडा और दक्षिण कोरिया भी जी-जान से जुटे हुए हैं।
नासा का चांद पर महत्वपूर्ण मिशन
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी अपने आर्टेमिस मिशन के जरिए इंसानों को एक फिर से चांद पर उतारने की योजना बना रहा है। नासा आर्टेमिस मिशन पर काम शुरू कर रहा है। नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक यह मिशन इस दशक का सबसे खास और महत्वपूर्ण मिशन होने जा रहा है जो कि अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगा। नासा का कहना है कि भले ही यह मिशन चांद से शुरू है लेकिन यह निकट भविष्य के मंगल अभियानों के लिए वरदान साबित होगा।
क्यों चांद पर पहुंचने के लिए इतनी जल्दी
समय समय पर अनुसंधानों के माध्यम से यह पता चला है कि चांद की सतह के नीचे कई बहुमूल्य धातुएं मौजूद हैं। सोने और प्लेटिनम का खजाना सतह के ठीक नीचे दबी हुई हैं। इसके अलावा धरती पर मिलने वाले कई अन्य धातुएं जैसे टाइटेनियम, यूरेनियम, लोहा भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। दावा यह भी है कि चंद्रमा पर पृथ्वी की दुर्लभ कई धातुएं हैं जो अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स को शक्ति प्रदान करेंगी। इतना ही नहीं चंद्रमा पर नॉन-रेडियोएक्टिव हीलियम गैस भी एक महत्वपूर्ण मात्रा में उपलब्ध है।
इस ‘यात्रा’ को लेकर अन्य देशों की चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विभाग के एक पूर्व अधिकारी जो अब कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक नीति संस्थान में अंतरिक्ष नीति पर शोध करते हैं, मैल्कम डेविस ने कहा कि पश्चिम में हमारी चिंता इस बारे में अधिक है कि विशेष रूप से संसाधनों तक पहुंच के नियम कौन निर्धारित करता है. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा जोखिम यह है कि आपके पास नियमों के दो विपरीत सेट हैं। यह भी कहा कि 2030 के दशक में चंद्रमा पर एक चीनी कंपनी हो सकती है जो उस पर एक संसाधन के साथ क्षेत्र का दावा कर रही है।
कैसे होगा वहां खनिजों का खनन
कई विशेषज्ञ यह मानते हैं कि महाशक्तियों की योजना चांद पर बस्तियां बसाने की है। इसी को देखते हुए चीन ने लंबी अवधि की योजना पर काम करते हुए अपना चंद्रमा उत्खनन कार्यक्रम शुरू किया है। उसकी कोशिश वर्ष 2036 तक चंद्रमा पर एक स्थायी ठिकाना बनाने की है। चीन चंद्रमा के टाइटेनियम, यूरेनियम, लोहे और पानी का इस्तेमाल रॉकेट निर्माण के लिए करना चाहता है। अंतरिक्ष में यह रॉकेट निर्माण सुविधा वर्ष 2050 तक अंतरिक्ष में लंबी दूरी तक उत्खनन करने की उसकी योजना के लिए बेहद जरूरी है।
चीन की इन तैयारियों को देखते हुए अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे चाहते हैं कि अमेरिका जल्द से जल्द चांद पर खुदाई का काम शुरू करे। उन्होंने बकायदा एक ऑर्डर पर दस्तखत किया था जिसमें यह कहा गया था कि अमेरिका को अंतरिक्ष में उपलब्ध संसाधनों को तलाशने और उसके इस्तेमाल का हक है। इतना ही नहीं यह भी कहा था कि ऐसा करने के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते की इजाजत लेने की जरूरत भी नहीं है।
फिलहाल यह तो तय है कि चंद्रमा से जुड़े प्रयोगों में चीन दुनिया के दूसरे देशों से हाल फिलहाल में आगे हैं। क्योंकि इस सदी में चीन ने सफलता पूर्वक अपना रोवर उतारा, लंबे समय तक जमीनी प्रेक्षण किया और चंद्रमा से नमूने भी ले आया है। इसके अलावा चीन के दो रोवर अभी भी चांद पर ही हैं। उधर नासा अपने मिशन पर सक्रिय है। अब देखना यह होगा कि चांद पर मौजूद खनिजों पर अपनी उपस्थिति कौन दर्ज कराएगा।
