प्रयागराज : (मानवीय सोच) 30 अगस्त शाम 7 बजकर 7 मिनट…महिला हेड कॉन्स्टेबल सुमित्रा पटेल फाफामऊ स्टेशन से सरयू एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में बैठीं। रात 11 बजकर 15 मिनट पर उन्हें अयोध्या कैंट में उतरना था। नहीं उतरीं। ट्रेन मनकापुर पहुंच गई।
वहां से करीब 2 घंटे बाद ट्रेन वापस अयोध्या जंक्शन आई, तो सुमित्रा खून से लथपथ सीट के नीचे पड़ी थीं। होश नहीं था। चेहरे पर चाकू के गहरे निशान थे। सिर फटा हुआ था। शरीर पर खून से भीगी वर्दी थी। आनन-फानन में जीआरपी ने उन्हें ट्रेन से उतारा और हॉस्पिटल पहुंचाया।
आज 10 दिन बीत गए हैं। मगर, सुमित्रा का यह हाल करने वालों को पुलिस नहीं खोज पाई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने खुद संज्ञान लिया। एडीजी प्रशांत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। लेकिन हमले का कारण नहीं खोज पाए टीम ने इस मामले की पड़ताल की।
सुमित्रा जिस ट्रेन से गई, उस ट्रेन से यात्रा की। उनके घर गई। भाई-बहन के बीच जारी विवाद को जाना। साथी के बारे में लोगों से सुना। उस 90 लाख के घर को भी देखा, जिसे भी हमले की एक वजह माना जा रहा। आइए सब कुछ एक तरफ से बताते हैं
