नई दिल्ली (मानवीय सोच) केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके पास अल्पसंख्यक मामलों के विभाग की जिम्मेदारी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। वह आज अपनी आखिरी केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी शामिल हुए थे जहां पीएम मोदी ने उनकी तारीफ भी की। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अब मुख्तार अब्बास नकवी को कई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। भाजपा ने इस बार उन्हें इस बार राज्यसभा नहीं भेजा है। ऐसे में चर्चाओं का बाजार और भी ज्यादा गर्म है। मुख्तार अब्बास नकवी उन गिने-चुने मुस्लिम नेताओं में हैं जो भाजपा में लंबे समय से हैं।
गुरुवार को मुख्तार अब्बास नकवी और जदयू के कोटे से राज्यसभा सांसद आरपीसी सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है। चर्चा है कि मुख्तार अब्बास नकवी को कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। 6 अगस्त को उपराष्ट्रपति पद के लिए भी वोटिंग होनी है। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि मुख्तार अब्बास नकवी को भाजपा अपना प्रत्याशी बना सकती है। जो भी भाजपा की ओर से प्रत्याशी होगा उसकी जीत तय है क्योंकि इसमें राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य वोट करते हैं। इस समय इन दोनों सदनों को मिलाकर एनडीए का ही बहुमत है।
दूसरी चर्चा यह भी है कि उन्हें जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल बनाया जा सकता है। हालांकि इस मामले में न तो सरकार की ओर से कुछ कहा गया है और न ही मुख्तार अब्बास नकवी की ओर से। दरअसल जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं गुपकार गठबंधन ने फैसला किया है कि वह मिलकर चुनाव लड़ेगा। ऐसे में मुस्लिम वोट की जरूरत भाजपा को भी है। पीर पंजाल और चिनाब घाटी की 16 सीटें भाजपा के लिए बहुत मायने रखती हैं। यहां पकड़ बनाने के लिए जरूरी है कि मुस्लिम वोट बैंक को अपनी ओर खींचा जाए।
हर समुदाय के पिछड़ों का जिक्र कर मोदी ने दिया था बड़ा संकेत
हैदराबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने नेताओं से कहा था कि वे हर समुदाय के पिछड़ों और वंचितों पर फोकस करें। उनके इस बयान के बाद मायने निकाले जा रहे थे कि भाजपा अब पसमांदा मुसलमानों पर फोकस करना चाहती है जो कि पिछड़े हैं और सुविधाओं से वंचित हैं। जानकारों का कहना है कि मुख्तार अब्बास नकवी को अगर उपराष्ट्रपति बनाया जाता है तो भाजपा को लाभ मिल सकता है।
बता दें कि नकवी 2010 से 2016 तक उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य थे। वह 1998 में पहली बार लोकसभा का चुनाव जीते थे और अटल सरकार में सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री रह चुके हैं। 2014 में जब मोदी सरकार बनी तो वह अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय मामलों के राज्यमंत्री बनाए गए। 2016 में उन्हें अल्पसंख्यक मामलों का स्वतंत्र प्रभार दिया गया। 2019 में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री बनाया गया। वह इस बार झारखंड से राज्यसभा सदस्य थे।
