वाराणसी (मानवीय सोच) यूपी के कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों की लेटलतीफी और गैरहाजिरी पर योगी सरकार की नकेल के बाद तैयारियां पूरी हो गई है। अब कंप्यूटर के सामने चेहरा दिखाने पर ही अटेंडेंस लगेगी। वाराणसी के काशी विद्यापीठ और संस्कृत यूनिवर्सिटी में इसकी तैयारी हो गई है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षकों की फेस इमेज कंप्यूटर में दर्ज की जा रही है। बायोमैट्रिक अटेंडेंस के लिए प्रशासनिक भवन के साथ ही सभी विभागों में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम लगाए जा चुके हैं। पहले चरण में परिसर में कार्यरत सभी स्थायी और अस्थायी शिक्षकों की अटेंडेंस की व्यवस्था होगी। यह पहली जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है।
राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल में दो महीने पहले सूबे के सभी विश्वविद्यालयों में बायोमैट्रिक हाजिरी के निर्देश दिए थे। इसके दृष्टिगत विद्यापीठ के विभागों में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम लगाए जाने के बाद अब शिक्षकों के चेहरे सॉफ्टवेयर में रजिस्टर किए जा रहे हैं। पहले चरण में विद्यापीठ के प्रशासनिक भवन में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और संविदा शिक्षकों के साथ कर्मचारियों का पंजीकरण हो रहा है।
सम्पूर्णानंद संस्कृत विवि में भी बायोमैट्रिक अटेंडेंस की तैयारी शुरू हो गई है। वहां फिलहाल फिंगर प्रिंट से हाजिरी लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए सिस्टम इंस्टॉल कर दिया गया है। वीसी प्रो. आनंद कुमार त्यागी के अनुसार एक जुलाई से विवि के समस्त विभागों में यह सिस्टम काम करने लगेगा। कर्मचारियों की हाजिरी लगाकर इसी के आधार पर भुगतान की व्यवस्था भी की जाएगी।
सबसे भरोसेमंद सॉफ्टवेयर
बायोमेट्रिक अटेंडेंस के लिए फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर सबसे भरोसेमंद है। बायोमेट्रिक के जानकार अनिल शर्मा बताते हैं कि एक मुख्य कंप्यूटर (सर्वर) से इसे जोड़ा जाता है। स्कैनर के सामने खड़े व्यक्ति का चेहरा रिकॉर्ड में दर्ज चेहरे से मिलान कर सॉफ्टवेयर उसकी हाजिरी दर्ज करता है।
