वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा की महामारी से प्रभावित क्षेत्रों की मदद के लिए ‘सम्मिलित प्रयास’ की जरूरत

नयी दिल्ली (मानविया सोच): कोविड-19 के नए रूप के बढ़ते संक्रमण के बीच कृषि और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए आने वाले दिनों में नयी सहायता उपाय किए जाने का संकेत देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि महामारी के प्रकोप से प्रभावित क्षेत्रों की मदद के लिए ‘सम्मिलित प्रयास’ जारी रखने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर चुनौतियों और कोराेना के नये रूप ओमिक्रॉन के फैलने से उत्पन्न चुनौतियों के बाद भी भारत में व्यावसायिक संभावनाओं का परिदृश्य अच्छा हो रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि खुदरा क्षेत्र में वृद्धि, समग्र आर्थिक संभावनाओं में सुधार तथा कर्ज लेने वालों की वित्तीय स्थिति मजबूत होने से कर्ज की मांग बढ़ने की संभावना है।

सीतारमण शुक्रवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कारेाबार की समीक्षा कर रही थीं। इस बैठक में बैंकों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों तथा प्रबंध निदेशकों के अलावा वित्त राज्य मंत्री डॉ भगवंत किशनराव कराड़ और वित्तीय सेवा विभाग के सचिव देवाशीष पांडा तथा अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, “ वित्त मंत्री ने आपातकालीन ऋण-सहायता गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की सफलता की सराहना की लेकिन कहा कि हमें अपनी उपलब्धियों को लेकर संतुष्ट होकर बैठने का समय नहीं है। हमारा सम्मिलित प्रयास होना चाहिए कि कोविड-19 के प्रकोप के लगातार बने रहने से प्रभावित क्षेत्रों की हम मदद करें।”

बयान के मुताबिक वित्त मंत्री ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे कृषि क्षेत्र, किसानों, खुदरा क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों की मदद जारी रखें। गौरतलब है कि सरकार ने कोविड-19 की दूसरी लहर से अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए मई 2020 में 20 लाख करोड़ रुपये का वृहद सहायता पैकेज घोषित किया था। उसके तहत नकदी संकट में घिरी एमएसएमई क्षेत्र की इकाइयों के लिए बैंकों की ओर से अतिरिक्त कर्ज सहायता पर सरकारी गारंटी की ईसीएलजीएस योजना घोषित की गयी थी। उसके बाद से इस योजना को चार बार विभिन्न क्षेत्रों के लिए बढ़ाया जा चुका है, इसके अंतर्गत कुल 4.5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की सुविधा करने का लक्ष्य है।

बैठक में  सीतारमण ने कोविड-19 के कारण आर्थिक गतिविधियों में उत्पन्न बाधाओं से निपटने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए निर्णयों के अनुपालन के लिए सरकारी क्षेत्र के बैंकों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गयी।
उन्होंने भविष्य में कोविड-19 के कारण और व्यवधन होने पर उससे निपटने के लिए बैंकों की तैयारी का भी जायजा लिया। बैंकों की ओर से वित्त मंत्री को बताया गया,“ भारत में अब कर्ज चुकाने की संस्कृति अच्छी हो रही है।”
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कारोबार में सुधार हुआ है तथा उन्होंने सरकार की नीतियों को अच्छा समर्थन दिया है ताकि अर्थव्यवस्था को दबाव से उबारा जा सके।
सरकारी बैंकों ने 2020-21 में 31,820 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था जो पिछले पांच वित्तीय वर्ष में सबसे ऊंचा है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में इन बैंकों का सम्मिलित शुद्ध लाभ 31,145 करोड़ रुपये रहा जो पिछले वित्त वर्ष के लाभ के करीब करीब बराबर है।
इन बैंकों की पूंजी की स्थिति पर्याप्त रूप से मजबूत है। सितंबर 2021 के अंत में इनकी पूंजी भारांकित जोखिम वाले कर्ज (सीआएआर)के 14.4 प्रतिशत के बराबर थी जबकि नियम के अनुसार सीआरएआर 11.5 प्रतिशत पर्याप्त है।

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