यातायात पुलिस द्वारा लाल-नीली बत्ती व हूटर-सायरन के अवैध प्रयोग को रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान से अब सरकार के विभागों में पुलिस के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनने लगा है। हालात देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इससे पुलिस को दूरगामी नुकसान हो सकता है। क्योंकि अन्य विभागों के अफसरों में पुलिस के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है। सर्वाधिक नाराजगी मजिस्ट्रेट स्तर के अफसरों में है। खासकर एडीएम और एसडीएम खासा नाराज हो रहे हैं। इसके अलावा जिले में डीएम के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद मुख्य विकास अधिकारी भी इस अभियान की जद में आ रहे हैं।
कई मुख्य चिकित्साधिकारी और संभागीय परिवहन अधिकारियों की बत्तियां भी उतारी गई हैं। परिणाम स्वरूप इन अफसरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है, जिसका खामियाजा पुलिस को भुगतना पड़ सकता है। यातायात विभाग के अभियान में आठ दिनों में पौने दो लाख वाहनों की जांच हो चुकी हैं। जिसमें से लाल-नीली बत्ती और हूटर वाले 86 हजार वाहनों को चेक किया गया। इसमें से 3900 वाहनों का चालान किया गया जबकि साढ़े तीन लाख समन शुल्क वसूला गया। इसी तरह पुलिस कलर्स प्रयोग करने वाले एक लाख वाहनों को चेक किया गया
