नई दिल्ली (मानवीय सोच) इस साल होली के त्योहार में भारतीय सामानों की बिक्री चरम पर रही. ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि लोग पिछले 2 साल से कोरोना वायरस महामारी के चलते किसी भी त्योहार को हर्षोल्लास के साथ नहीं मना पाए थे. सरकार की तरफ से जारी किए गए निर्देशों का पालन करते हुए लोगों ने अपनी खुशियों की आहुति देते हुए घरों में महफूज रहना ही जरूरी समझा. लेकिन इसके साथ-साथ चीनी प्रोडक्ट्स के सामान का भी कई देशों ने बहिष्कार किया, जिसमें भारत ने अहम भूमिका निभाई.
चीनी सामान पर भारत ने लगाई रोक
बता दें कि भारत ने चीनी सामान को पूरी तरह से बैन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. भारत के इस फैसले से चीन को बड़ा झटका तो जरूर लगा है क्योंकि पड़ोसी देश होने के चलते चीन का सबसे अधिक सामान भारत में आयात होता था. लेकिन चीन की तरफ से कोरोना महामारी की भयानक देन को भारत नहीं भूल सकता है और ये फैसला लेना कि चीन के सभी सामान को अब भारत में आने नहीं दिया जाएगा कहीं ना कहीं कठिन भी था.
भारतीय बाजारों पर चीन का कब्जा खत्म!
भारत में त्योहार के मौके पर चाहे वो होली हो या दिवाली सभी बाजारों में सामान चीन का ही होता था लेकिन इस बार होली के त्योहार में बाजारों में अलग ही रौनक दिखी. इस साल की होली लोगों ने भारतीय प्रोडक्ट्स के साथ मनाई. यानी कि चीनी सामान की जगह इस बार लोगों ने स्वदेशी पिचकारी और गुलाल का खूब इस्तेमाल किया. पिछले कई सालों तक चीनी प्रोडक्ट्स ने भारतीय बाजार पर पूरी तरह कब्जा कर रखा था लेकिन कोरोना के चलते चीनी सामान के आयात को रोक दिया गया जिसका सीधा फायदा भारतीय दुकानदारों को मिला.
व्यापारियों ने पीएम मोदी को कहा शुक्रिया
इस पर व्यापारियों के संगठन Confederation of All India Traders (CAIT) ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया और कहा कि दो साल कोविड के वनवास के बाद इस साल व्यापारियों ने होली काफी अच्छे से मनाई. पूरे देश में पिछले साल के मुकाबले इस साल बिजनेस में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
एक अनुमान के अनुसार, इस बार होली में देशभर में करीब 20 हजार करोड़ रुपये का बिजनेस हुआ. वहीं अकेले दिल्ली में 3 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस हुआ. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि इस बार चीनी सामान का एक भी प्रोडक्ट नहीं बिका. इससे पहले हर साल लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का चीनी सामान बिकता है.
