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उच्च योग्य डिग्री होल्डर चला रहे गिरोह, SGPGI डॉक्टर को किया डिजिटल अरेस्ट

एसजीपीजीआई की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रुचिका टंडन को डिजिटल अरेस्ट कर 2.81 करोड़ की ठगी करने वाले जालसाजों ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और दुबई के नंबरों से यूएसटीडी और बिटक्वाइन की ट्रेडिंग की थी। अब तक पकड़े गये 16 आरोपियों में 4 इंजीनियर, दो लॉ ग्रेजुएट, दो ई-कॉमर्स ग्रेजुएट, एक बैंक प्रबंधक, एक बैंक सिक्योरिटी सुपरवाइजर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल है। गिरोह का नेटवर्क ओड़िशा, बिहार, राजस्थान और यूपी में फैला है।

आरोपियों के मोबाइल से यह खुलासा हुआ कि डिजिटल अरेस्ट कर एसजीपीजीआई की डॉक्टर से वसूली करने वाले गिरोह ने अपना पूरा नेटवर्क टेलीग्राम पर बना रखा था। उसी पर एक-दूसरे से ठगी से संबंधित जानकारी साझा करते थे। डार्क वेब के जरिये लोगों का डाटा खरीदते थे। ताकि उनकी जानकारी गोपनीय रहे और आसानी से ट्रेस न हो सकें। एसटीएफ 16 आरोपियों को पकड़ चुकी है। बुधवार को जिन पांच आरोपियों को जेल भेजा था उसमें ऋषिकेश कुमार उर्फ मयंक, गोपाल कुमार उर्फ रोशन, गणेश कुमार, मणिकांत पांडेय और राजेश गुप्ता शामिल हैं।

एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि ये आरोपी आपस में टेलीग्राम पर जुड़े थे। वहां पर सभी ने अपने फेक नाम रखे हुए थे। उन्हीं ग्रुपों में लोगों का डाटा डाला जाता है। डॉ. रुचिका को जब डिजिटल अरेस्ट किया था तो कॉल पर सीबीआई अफसर बनकर गोपाल ने बात की थी। साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने बताया कि गोपाल नौ सेना में संविदा पर टेक्निकल टीम में है। वह आईएनएस भेलसुरा जामनगर गुजरात में कंप्यूटर आपरेटर के पद पर 2019 से काम करता था। एक साल पहले वहां से भाग निकला। इसके बाद पटना जाकर एक ठेकेदार के साथ मिलकर मिट्टी का काम करने लगा। वहीं, से साइबर ठग गिरोह के संपर्क में आया। नौ सेना के संबंधित अधिकारियों को इस बारे में रिपोर्ट भेजी जाएगी।

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