कन्हैया लाल की हत्या में कैसे आया इस संगठन का नाम : क्या है दावत-ए-इस्लामी

उदयपुर (मानवीय सोच)  उदयपुर में मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद द्वारा जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद पूरे मामले की अलग-अलग तरीक से तहकीकात की जा रही है। राजस्थान के डीजीपी एमएल लाठर ने कहा है कि इन दोनों आरोपियों में से एक आरोपी साल 2014 में कराची में दावत-ए-इस्लामी में गया था। अब दावत-ए-इस्लामी का नाम सामने आने के बाद इस बात की भी जांच होगी कि कट्टरपंथी संगठन से इन दोनों आरोपियों का क्या लिंक है?  हम आपको अपनी इस रिपोर्ट में बताते हैं कि आखिर यह दावत-ए-इस्लामी क्या है?

एक कट्टरपंथी सुन्नी संगठन

दावत-ए-इस्लामी एक कट्टरपंथी सुन्नी संगठन है। बताया जाता है कि इसका गठन साल 1981 में पाकिस्तान के कराची में हुआ था। आज दुनिया के 194 देशों में इस संगठन का नेटवर्क है। जानकारी के मुताबिक, इस संगठन का मुख्य काम पैगम्बर मोहम्मद के संदेशों का प्रचार-प्रसार करना है। यहां ध्यान दिला दें कि उदयपुर में हत्या के आरोपियों ने भी अपने वीडियो में इस्लाम और पैगम्बर का जिक्र किया था।

‘मदनी’ चैनल के जरिए करते हैं प्रचार

इस संगठन के सदस्य हरी पगड़ी बांधते हैं, जिसे हरा अमामा भी कहा जाता है। दावत-ए-इस्लामी संगठन अपनी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए मदनी’ चैनल चलाता है। इस चैनल का संचालन भी पाकिस्तान से ही होता है। इसमें उर्दू, अंग्रेजी और बांग्ला जैसी अहम भाषाओं में कार्यक्रम प्रसारित किये जाते हैं।

कौन है मुखिया

बताया जाता है कि इस संगठन का मुखिया इलियास अत्तारी है। एक गौर करने वाली बात यह भी है कि इस संगठन के लोग अपने नाम के आगे अत्तारी लगाते हैं। कन्हैयालाल की हत्या के आरोपी मोहम्मद रियाज ने भी अपने नाम के साथ अत्तारी लगाया हुआ है।

भारत में मौजूद हैं संगठन के सदस्य

दावा किया जाता है कि इस संगठन के सदस्य भारत में भी मौजूद हैं। इस वक्त सैयद आरिफ अली अत्तारी हिन्दुस्तान में इस संगठन का काम देख रहा है। संगठन ने अपना मुख्यालय दिल्ली और मुंबई में बनाया है। उदयपुर के डीजीपी ने कहा है कि इस ग्रुप के सदस्य कानपुर में भी सक्रिय हैं।

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