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कोई भी मन मुताबिक बदल सकता है अपनी जाति

नई दिल्ली (मानवीय सोच) भारत में संविधान ने सभी को धार्मिक स्वतंत्रता की आजादी दी है. यानी नागरिक कोई भी धर्म को मान सकते हैं. इसके साथ ही धर्म परिवर्तन भी कर सकते हैं. लेकिन कभी आपके मन में भी सवाल आया होगा कि क्या हम अपनी जाति  बदल सकते हैं. इसके लिए कानून क्या कहता है आइए बताते हैं.

जन्म के साथ तय होती है जाति?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में जाति का मतलब बताया है. कोर्ट ने इनसाइक्लोपीडिया अमेरिकाना के हवाले से बताया कि ‘जाति एक सामाजिक वर्ग है, जो स्थिर है और इसमें हर व्यक्ति की मेंबरशिप जन्म से मिल जाती है और जन्म के साथ ही यह तय हो जाती है. इसका मतलब है कि हर एक बच्चा अपने जन्म के साथ ही एक जाति की मेंबरशिप लेकर पैदा होता है. हर जाति के साथ ही उन्हें कुछ परंपराएं आदि का अधिकार भी मिलता है.

क्या जाति बदली जा सकती है?

जाति बदलने को लेकर संविधान में कोई विशेष कानून नहीं है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कुछ आदेशों से ये पता चलता है कि जाति नहीं बदली जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने जाति को लेकर स्पष्ट किया है कि एक व्यक्ति अपनी जाति में बदलाव नहीं कर सकता है जबकि वो धर्म में बदलाव कर सकता है. दरअसल, जाति एक ऐसी व्यवस्था या वर्ग है, जो आपके जन्म से संबधित है. इसलिए कहा जा सकता है कि आप अपनी जाति कभी भी नहीं बदल सकते हैं.

कैसे बदल सकते हैं जाति?

lawrato वेबसाइट पर लीगल एडवाइजर एडवोकेट हरि सीजी का कहना है कि ‘एक बार आवेदन करने के बाद कास्ट को बदला नहीं जा सकता. जाति परिवर्तन का कोई प्रावधान नहीं है. अगर आप जाति बदलना चाहते हैं, तो उसका केवल एक ही तरीका है कि हिंदू से धर्म बदल लें. फिर कुछ समय बाद वापस हिंदू धर्म में लौट आएं और उस समय अपनी पसंद की जाति स्वीकार करें’

 

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