एक ओर जहां कोलकाता में ट्रेनी नर्स के रेप और मर्डर के लिए पूरा देश सड़कों पर है। तो वहीं मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में भूचाल आया हुआ है। फिल्म इंडस्ट्री में यह भूचाल हाल ही सामने आई जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट की वजह से आया है, जिसमें मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के हालात पर बात की गई। रिपोर्ट में फिल्म इंडस्ट्री के बारे में कुछ चौंकाने वाले खुलासे भी किए गए हैं।
इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले लोग उन महिलाओं पर अपने पावर का दुरुपयोग करते हैं, जो एक्टिंग करना चाहती हैं और सेल्युलाइड पर आना चाहती हैं। जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को लेकर लिखा है, “मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में पीड़िताओं के सेक्शुअल एब्यूज, हैरेसमेंट के बारे में सुनकर हैरान थी।”
जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट में लिखा है, “सिनेमा में महिलाएं अक्सर काम पर अकेले जाने में असुरक्षित महसूस करती हैं। कई सबूत यह बताते हैं कि रोजगार के अवसरों के लिए सेक्शुअल डिमांड की जाती है, जो इसे अन्य प्रोफशंस से अलग बनाती है। टीचिंग, मेडिसिन या इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को इस तरह की स्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता है। इन नौकरियों में आमतौर पर किसी का स्किल और इंटरव्यू ही पर्याप्त होता है। लेकिन, फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच परेशान करने वाली हकीकत बनी हुई है।”
