उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, यहां गंगा नदी पर बना 150 साल पुराना पुल का एक हिस्सा गिर गया है. बता दें कि 150 साल पुराने गंगा पुल का एक हिस्सा मंगलवार की सुबह भरभराकर गिर गया, जिससे स्थानीय जनता में सनसनी फैल गई है. यह पुल कानपुर को लखनऊ से जोड़ने का ऐतिहासिक मार्ग था और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सजीव गवाह था. हालांकि, पुल को चार वर्ष पहले ही दरारों के कारण बंद कर दिया गया था.
बता दें कि कानपुर नगरपालिका ने इसे ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संजोने के लिए काफी प्रयास किए थे और लाखों रुपये खर्च किए थे, लेकिन मंगलवार की सुबह का हादसा सभी प्रयासों पर पानी फेर गया. गंगा पुल के ऊपर वाहन चलाते थे, जबकि नीचे साइकिल और पैदल यात्री चलते थे. अंग्रेजों के समय यह पुल कानपुर से लखनऊ जाने का एकमात्र मार्ग हुआ करता था, जिसमें लोग कानपुर से उन्नाव होकर लखनऊ पहुंचते थे. 1875 में, ब्रिटिश इंजीनियरों ने इस पुल का निर्माण करवाया था, जिसमें करीब 7 साल का समय लगा था. 1910 में इसके समानांतर रेलवे पुल भी बनाया गया था.
इसे सहेजने के लिए प्रशासन की थी कोशिश
कुछ साल पहले जब यह पुल बंद किया गया तो उन्नाव के शुक्लागंज में रहने वाली 10 लाख की आबादी पर काफी फर्क पड़ा. इसको चालू करने के लिए उन्नाव के सांसद से लेकर कई विधायक और मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से लेकर प्रशासन तक दौड़ लगाई थी. लेकिन कानपुर आईआईटी ने इसकी चेकिंग करके बता दिया था यह पुल जर्जर है,
चलने लायक नहीं है और कभी भी गिर सकता है. जिसके बाद जिला प्रशासन ने इस पुल को चालू करने से पूरी तरह इनकार कर दिया था. पुल का एक हिस्सा गिर जाने के बाद अब इस पूरी संरचना को बंद कर दिया गया है और सुरक्षा के दृष्टिकोण से यहां आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है. बता दें कि जब ये पुल चालू था तो इससे रोजाना 22 हजार चौपहिया-दोपहिया समेत 1.25 लाख लोग इस पुल से गुजरते थे.
