लखनऊ : (मानवीय सोच) यूपी पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन एम देवराज को शासन ने हटा दिया है। लेकिन बिजली विभाग के अंदर एम देवराज एक ऐसे अधिकारी के तौर पर जाने जाते रहेंगे जो कभी किसी को पसंद नहीं आए। उसके बाद भी लंबे समय तक विभाग में रहे। उनको हटाने के लिए कर्मचारियों ने 65 घंटे की हड़ताल की।
पिछले दो दशक में सबसे बड़ा आंदोलन रहा। लेकिन एम देवराज को हटाना तो दूर वह विभाग में और मजबूत हो गए। मजबूत भी इतने कि मंत्री की बात भी नहीं सुनते थे। लेकिन ऐसा क्या हो गया कि उनको हटा दिया गया।
बिजली व्यवस्था में नहीं कर पाए सुधार
ईमानदार और सख्त निर्णय लेने के लिए जाने जाने वाले एम देवराज पिछले दो साल से बिजली व्यवस्था में कोई सुधार नहीं कर पाए। विभाग को काम करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिला। खासकर उपकेंद्र के स्तर पर जो काम होने थे। वह नहीं हुए। ट्रांसफॉर्मर से लेकर केबिल बदलने तक के काम प्रभावित रहे। इसकी वजह से बिजली व्यवस्था में लगातार गिरावट दर्ज की गई। इसकी परिणाम यह हुआ कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था चौपट हो गई।
