नई दिल्ली (मानवीय सोच) ज्ञानवापी मामले में वाराणसी की जिला अदालत में लगातार सुनवाई चल रही है। लगातार तीन दिनों से हिंदू पक्ष अपने तर्क रख रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल करके ज्ञानवापी मस्जिद में धार्मिक अनुष्ठान की मांग की गई है। इस अर्जी में कहा गया है कि सावन के महीने में वहां भगवान शिव की आराधना करने की अनुमति दी जाए। बता दें कि ज्ञानवापी का मामला पहले जब सुप्रीम कोर्ट में गया था को कोर्ट ने इसे जिला जज को ट्रांसफर कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अंतरिम आदेश के तहत कथित शिवलिंग वाले क्षेत्र की सुरक्षा जारी र हेगी। कोर्ट ने कहा था कि सिविल कोर्ट की बजाय मामले की सुनवाई जिला अदालत में जिला जज द्वारा होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को 8 हफ्ते का समय दिया था। 84 कार्यदिवसों के भीतर सुनवाई पूरी करके जिला अदालत को फैसला सुनाना है और इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देनी है। ऐसे में इस मामले में रोज सुनवाई के आदेश दिए गए हैं।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति स्थल के अध्यक्ष राजेश मणि त्रिपाठी नाम के याचिकाकर्ता ने यह अर्जी दी ह। उनका कहना है कि सावन का महीना शुरू हो रहा है इसलिए हिंदुओं को ‘शिवलिंग’ की पूजा का अधिका देना चाहिए। याचिका में उन्होंने कहा, ‘संविधान के अनुच्छेद 25 में दिए गए अधिकार के मुताबिक हिंदुओं को पूजा पाठ करने और धार्मिक अनुष्ठान करने का अधिकार है। सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा होती है। इसलिए हमें संविधान में दर्ज अधिकार के तहत शिवलिंग की पूजा करने की इजाजत मिलनी चाहिए।’
