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दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की समस्या का क्या है हल?

दिल्ली  (मानवीय सोच)  पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने रविवार को कहा कि वह दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी का दर्जा देने वाले अध्ययनों से हताश नहीं होते, बल्कि इसे एक चुनौती के रूप में लेते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के कई दिशा-निर्देशों के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या बरकरार है, क्योंकि पड़ोसी राज्य इनके कार्यान्वयन को लेकर गंभीर नहीं हैं।

गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या को केवल संबंधित राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों के एक पैनल के माध्यम से हल किया जा सकता है, जिसकी हर महीने एक बैठक होनी चाहिए।

दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी का दर्जा देने वाले एक अध्ययन पर उनके विचार पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं हताश नहीं होता। मैं इसे एक चुनौती के रूप में लेता हूं। भारत में ऐसे शहर हैं, जो दिल्ली से ज्यादा प्रदूषित हैं, लेकिन इनमें से किसी ने भी दिल्ली की तरह प्रदूषण की समस्या से निपटने की दिशा में काम नहीं किया है। वायु प्रदूषण पर लगाम लगाना हमारी सरकार की शीर्ष दस प्राथमिकताओं में से एक है और दिल्ली इस दिशा में एक योद्धा बनकर उभरी है।

दुनिया के 30 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 22 भारत में

स्विस संगठन ‘आईक्यूएयर’ द्वारा पिछले साल जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दुनिया के 30 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 22 भारत में हैं, जबकि दिल्ली वैश्विक स्तर पर सबसे प्रदूषित राजधानी शहर है।

राय ने कहा कि दिल्ली देश का पहला ऐसा शहर है, जिसने सभी औद्योगिक इकाइयों को पीएनजी में तब्दील कर दिया है और वृक्ष प्रतिरोपण की एक नीति लायी गई। हमने कारों के लिए ऑड-ईवन योजना ऐसे समय में लागू की, जब किसी अन्य राज्य ने ऐसा करने का साहस नहीं किया।

राज्यों को सीएक्यूएम की नई नीति ठीक से लागू करने की जरूरत

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सीएक्यूएम की नई नीति पर पर्यावरण मंत्री ने कहा कि राज्यों को इसे ठीक से लागू करने की जरूरत है। नीति में अगले पांच वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर घटाने के लिए क्षेत्रवार कार्य योजनाओं को सूचीबद्ध किया गया है।

राय ने कहा कि समस्या यह है कि सीएक्यूएम नीतियों को लागू नहीं कर सकता। यह काम राज्यों को करना होगा। उदाहरण के तौर पर, हरियाणा में अभी भी कम बिजली आपूर्ति वाले कुछ क्षेत्रों में डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल करने की अनुमति है। यह वर्षों से चला आ रहा है।

उन्होंने सवाल किया कि हमने दिल्ली में पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन फिर भी लोग ऐसा करते हैं। आपको क्या लगता है, ये पटाखे कहां से आते हैं?

दिल्ली के 69 फीसदी प्रदूषण के लिए एनसीआर के आसपास के इलाके जिम्मेदार

राय ने ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान और विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र के अध्ययनों का हवाला देते हुए दावा किया कि दिल्ली का 31 फीसदी प्रदूषण स्थानीय स्तर से उत्पन्न होता है, जबकि शेष 69 प्रतिशत के लिए एनसीआर के आसपास के इलाके जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण अकेले दिल्ली की समस्या नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी के 300 किलोमीटर के दायरे में मौजूद हर क्षेत्र एक ही ‘एयरशेड’ के तहत अंतर्गत आता है और इसका प्रदूषण सभी को प्रभावित करता है।” ‘एयरशेड’ को वायु गुणवत्ता मानक से जुड़ी एक भौगोलिक सीमा माना जाता है।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए हमें एक समग्र नीति और राजनीतिक इच्छा-शक्ति की जरूरत है। यह तब तक हल नहीं होगी, जब तक कि मंत्री स्तर पर किसी प्रकार की प्रतिबद्धता नहीं जताई जाती। उन्होंने कहा कि मैं मंत्री स्तर पर एक समिति बनाने और दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए संयुक्त कार्य योजना तैयार करने की मांग करता रहा हूं। इस समिति को हर महीने एक बार बैठक करना चाहिए। फिलहाल संयुक्त कार्रवाई ही एकमात्र समाधान है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री कई पत्र लिखे, किसी का जवाब नहीं मिला

राय के मुताबिक, उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को कई पत्र लिखे हैं, जिसमें मंत्रियों की समिति बनाने और संयुक्त कार्य योजना तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, लेकिन उन्होंने एक बार भी जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि, हमने उम्मीद नहीं खोई है। हमें उनके सहयोग की जरूरत है और हम यह मांगते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि अगर अन्य लोग सहयोग नहीं देने का फैसला करते हैं तो हम खाली नहीं बैठने वाले हैं। हम प्रदूषण के हमे हिस्से को घटाने के लिए सभी उपाय करना जारी रखेंगे। हम वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दुनियाभर के नए प्रौद्योगिकी समाधानों पर भी गौर कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि अगर एनसीआर के शहर अपने हिस्से के प्रदूषण के स्तर में कमी लाते हैं तो दिल्ली राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत निर्धारित उत्सर्जन में कटौती संबंधी लक्ष्य को 2024 तक हासिल कर सकती है।

डीजल बसें दिल्ली की सीमा पर हवा को प्रदूषित करती हैं

पर्यावरण मंत्री ने रेखांकित किया कि इलेक्ट्रिक बसें दिल्ली के अंदर चलती हैं, जबकि डीजल बसें सीमा पर हवा को प्रदूषित करती हैं। एनसीएपी में ऐसे 132 शहर शामिल हैं, जो निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते हैं। इन शहरों की पहचान राष्ट्रीय वायु निगरानी कार्यक्रम के तहत साल 2011 से 2015 के बीच प्राप्त परिवेशी वायु गुणवत्ता आंकड़ों के आधार पर की गई है। पीएम10 और पीएम2.5 (हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास के कण) के लिए स्वीकार्य वार्षिक मानक क्रमशः 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

हालांकि, 2017 में दिल्ली की हवा में पीएम10 का औसत वार्षिक सकेंद्रण 240 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी। 2024 तक इसे घटाकर 168 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पंजाब में पराली जलाने के मुद्दे पर राय ने कहा कि राज्य में आम आदमी पार्टी (आप) की  नवगठित सरकार निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव लाने जा रही है। हालांकि, पराली जलाने की घटनाएं को की संख्या शून्य पर लाने में कुछ समय लग सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या पंजाब में पराली जलाने पर किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा, राय ने कहा कि कोई यह उम्मीद नहीं कर सकता कि डंडे चलाने से समस्या का समाधान हो जाएगा।

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