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दुनिया में एक नया संकट बढ़ाएगी चीन की कर्ज पॉलिसी

(मानवीय सोच) जर्मनी ने चीन की कर्ज पॉलिसी पर सवाल उठाया है और कहा है कि इससे दुनिया के सामने एक नई संकट खड़ी हो सकती है। जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने चीन की कर्ज पॉलिसी में पारदर्शिता की कमी बताया और कहा कि यह विकासशील और उभरते देशों के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया के सामने एक नया ऋण संकट पैदा हो सकता है।

जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ का यह बयान श्रीलंका के संकट और पाकिस्तान में जारी आर्थिक किल्लत के बीच आया है। स्टटगार्ट में जर्मनी के कैथोलिक दिवस पर एक पैनल चर्चा में स्कोल्ज़ ने कहा, ‘वास्तव में यह एक गंभीर खतरा है ग्लोबल साउथ में अगला बड़ा संकट उन कर्जों से होगा जो चीन ने दुनिया भार में दिए हैं और खुद पर पूरी तरह से नजर नहीं रखता है, क्योंकि इसमें बहुत सारे खिलाड़ी शामिल हैं।’

चीन की इस नीति का पूरी दुनिया पर पड़ेगा असर

स्कोल्ज़ ने आगे कहा कि आगे चलकर यह चीन और ग्लोबल साउथ के देशों, दोनों को एक बड़े आर्थिक और वित्तीय संकट में डाल देगा, बाकी दुनिया भी इससे अछूती नहीं सकती है। दरअसल, ओलाफ स्कोल्ज़ ने जो ग्लोबल साउथ की बात कही है, उन्हें तीसरी दुनिया का देश भी कहा जाता है। इनमें श्रीलंका, पाकिस्तान, इराक, ईरान जैसे एशियाई देश शामिल हैं। इसके अलावा लैटिन अमेरिकी देश, कैरेबियन देश और अफ्रीकी देशों को भी साउथ वर्ल्ड कंट्रीज कहा जाता है।

अकेले पाकिस्तान पर चीन का 11 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज

चीन के कर्ज की बात करे तो वो पाकिस्तान को अब तक करीब 11 अरब डॉलर का ऋण दे चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष पाकिस्तने चीन को ब्याज के तौर पर 26 अरब पाकिस्तानी रुपए का भुगतान किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबित फिलहाल आर्थिक तंगी झेल रहे श्रीलंका के ऊपर पर चीन का कर्ज है। श्रीलंका के ऊपर 5 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज का 20 फीसदी हिस्सा अकेले चीन का है।

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