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नेता सत्येंद्र जैन के खिलाफ बंद हो गई जांच? क्लोजर रिपोर्ट को लेकर CBI ने साफ की स्थिति

नई दिल्ली (मानवीय सोच)  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को उन रिपोर्टों का खंडन किया है जिसमें दावा किया गया था कि सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में दिल्ली के कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि सत्येंद्र जैन के खिलाफ कोई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है।

सीबीआई के अधिकारी ने बताया कि सीबीआई ने 24 अगस्त, 2017 को सत्येंद्र जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था और 3 दिसंबर, 2018 को उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग से शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने 2017 में इस मामले में सबसे पहले प्रारंभिक जांच (पीई) की थी। बाद में निष्कर्षों के आधार पर एक एफआईआर दर्ज कर तलाशी और छापेमारी की गई थी।

जांच के दौरान सीबीआई ने कहा कि उसे 2016 में पीडब्ल्यूडी विभाग में एक क्रिएटिव टीम में पेशेवरों की भर्ती में अनियमितता मिली थी। एजेंसी ने कहा कि शिकायत के अनुसार, विज्ञापनों के माध्यम से कहा गया था कि इन पेशेवरों को ‘ट्रेंडिंग मार्केट रेट’ के अनुसार लगभग 25,000 रुपये से 1,00,000 रुपये के बीच भुगतान किया जाएगा।

9 जून तक के लिए ईडी की हिरासत में रहेंगे जैन

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को दिल्ली के स्वास्थ्य और गृह मंत्री सत्येंद्र जैन को कोलकाता की एक कंपनी से संबंधित कथित हवाला लेन-देन के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को जैन को 9 जून तक के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

ये है पूरा मामला

सत्येंद्र जैन ने कथित तौर पर दिल्ली में कई शेल कंपनियां बनाई थीं या खरीदी थीं। उसने कथित तौर पर कोलकाता के तीन हवाला ऑपरेटरों की 54 शेल कंपनियों के जरिये 16.39 करोड़ रुपये की ब्लैक मनी को वाइट में बदला था। बताया जाता है कि जैन के पास प्रयास, इंडो और अकिंचन नाम की कंपनियों में बड़ी संख्या में शेयर थे। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल की सरकार में मंत्री बनने के बाद 2015 में उनके सारे शेयर उनकी पत्नी को ट्रांसफर कर दिए गए थे।

ये कंपनियां अपने कोलकाता की कंपनियों को कैश ट्रांसफर करती थीं और यही कंपनियां बाद में शेयर खरीदने के बहाने, कानूनी साधनों का उपयोग करके जैन को पैसे वापस भेजती हैं। इन कंपनियों ने कथित तौर पर 2010 से 2014 तक सत्येंद्र जैन के लिए 16.39 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की है।

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