प्रदेश (मानवीय सोच) सरकार सड़कों के रखरखाव के लिए एक बड़ा फैसला लेने जा रही है। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर एक एजेंसी को ठेका दिया जाएगा, जो पीडब्ल्यूडी की सभी सड़कों की रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इसके लिए कैबिनेट में शीघ्र ही प्रस्ताव लाया जाएगा।
यूपी में पीडब्ल्यूडी का 2.60 लाख किमी से ज्यादा लंबा सड़कों का जाल है। अभी पूर्व में निर्मित सड़कों के रखरखाव के लिए अलग-अलग टेंडर किए जाते हैं, लेकिन अब इस व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। नए प्रस्ताव के अनुसार, एक ब्लॉक की सभी सड़कों को एक इकाई माना जाएगा। इसमें उस क्षेत्र की ग्रामीण सड़कें, अन्य जिला मार्ग (ओडीआर), प्रमुख जिला मार्ग (एमडीआर) और राज्य राजमार्ग (एसएच) शामिल होंगी। सिर्फ एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी की एनएच विंग की सड़कें इस दायरे से बाहर होंगी, क्योंकि इनके रखरखाव के लिए केंद्र सरकार राशि देती है।
पहले चरण में इस योजना में 18 मंडलों के 1-1 ब्लॉक को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया जाएगा। चयनित एजेंसी को पांच साल के लिए संबंधित ब्लॉक की सभी सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालनी होगी। टेंडर की शर्त में यह भी होगी कि सड़कों की मरम्मत के लिए उनके पास अत्याधुनिक मशीनों की व्यवस्था हो ताकि, नियमित रूप से मरम्मत का कार्य चलता रहे। हर दिन ब्लॉक में एक मशीन से दो किमी सड़कों की मरम्मत का लक्ष्य होगा।
विकसित देशों में इसी तरह से सड़कों को दुरुस्त रखा जाता है। पीडब्ल्यूडी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया गया है। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही ब्लॉकों का चयन कर लिया जाएगा। अलबत्ता अब अगर किसी सड़क का नवीनीकरण होता है या सड़क नव निर्मित है, तो उसके पांच साल के रखरखाव का जिम्मा निर्माण करने वाली एजेंसी या फर्म का ही होगा।
