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फ्रांस में हुए संसदीय चुनाव में किसी को बहुमत नहीं

फ्रांस में हुए संसदीय चुनाव में वामपंथी गठबंधन ने रविवार को धुर-दक्षिणपंथी दलों को शिकस्त देते हुए सबसे ज्यादा सीटें जीतीं। हालांकि, वह बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा, जिससे देश में राजनीतिक संकट गहराने के साथ ही त्रिशंकु संसद की आशंका बढ़ गई है। फ्रांस में राजनीतिक उथल-पुथल से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है और यूक्रेन में युद्ध, वैश्विक कूटनीति तथा यूरोप की आर्थिक स्थिरता पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

फ्रांस की संसद का कार्यकाल 2027 में खत्म होना था, लेकिन यूरोपीय संघ में नौ जून को बड़ी हार मिलने के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने समय से पहले संसद भंग कर बड़ा दांव खेला था। उन्होंने कहा था कि एक बार फिर मतदाताओं के बीच जाने से स्थिति ‘स्पष्ट’ होगी।

हालांकि, उनका यह दांव लगभग हर पड़ाव पर उल्टा पड़ता दिखा है। सोमवार को जारी आधिकारिक नतीजों के मुताबिक, संसदीय चुनाव में तीनों प्रमुख गठबंधन में से कोई भी 577 सदस्यीय नेशनल असेंबली में बहुमत के लिए जरूरी 289 सीटों का जादुई आंकड़ा नहीं हासिल कर सका।  नतीजों के अनुसार, वामपंथी गठबंधन ‘न्यू पॉपुलर फ्रंट’ 180 से अधिक सीटों पर जीत के साथ पहले स्थान पर रहा,

जबकि मैक्रों नीत मध्यमार्गी गठबंधन के खाते में 160 से ज्यादा सीटें गईं और वह दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, मरीन ले पेन के नेतृत्व वाली धुर-दक्षिणपंथी पार्टी ‘नेशनल रैली’ और उसके सहयोगी दलों को 140 से अधिक सीटों पर जीत के साथ तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। हालांकि, ‘नेशनल रैली’ का यह प्रदर्शन 2022 के उसके प्रदर्शन से कहीं बेहतर है, जब पार्टी को 89 सीटें हासिल हुई थीं।

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