अमरोहा : (मानवीय सोच) आंसू चाहे इंसानों की आंखों से टपके या जानवरों की आंखों से, बाहर तभी आते है जब दिल में गहरा दर्द होता है… यह पंक्तियां जोया के रहने वाले बुजुर्ग रामकुंवर सिंह और एक बंदर के स्नेह पर सटीक बैठती हैं। दो वक्त की रोटी से शुरू हुआ बंदर का रामकुंवर सिंह के प्रति लगाव उनके निधन के बाद भी देखने को मिला। जिसे देखकर हर कोई आश्चर्य चकित रह गया। बंदर रामकुंवर सिंह के निधन के बाद दिनभर उनके शव के पास बैठा रहा। बाद में सीने से लिपटकर तिगरी गंगा घाट तक पहुंचा और अंतिम विदाई दी। इतना ही नहीं अंतिम संस्कार के बाद बंदर अन्य लोगों के साथ घर तक वापस आया।
ये मामला कस्बा जोया के मोहल्ला जाटव कॉलोनी के रहने वाले बुजुर्ग रामकुंवर सिंह से जुड़ा है। परिजनों के मुताबिक दो महीना पहले एक बंदर रामकुंवर सिंह के पास आकर बैठ गया था। तभी रामकुंवर सिंह ने उसे खाने के लिए रोटी दे दी। जिसके बाद बंदर उनके पास प्रतिदिन का आने लगा। रोजाना रामकुंवर के पास आकर बैठता और रोटी खाता। बाद में काफी देर तक उनके साथ खेलता रहता था। ले
