लखनऊ : (मानवीय सोच) कभी ज्ञानवापी तो कभी केदारनाथ-बद्रीनाथ पर बयान देश-प्रदेश में राजनीतिक लहरें पैदा कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव से ऐन पहले इस तरह की गर्माहट किसे और कितना नफा-नुकसान करेगी, यह तो भविष्य ही साफ करेगा। लेकिन, राजनीतिक विश्लेषक इसे लोकसभा चुनाव से पहले मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कोशिशों के तौर पर ले रहे हैं। उन्हें आशंका है कि इन हलचल के तले चुनाव में कहीं रोजी-रोटी, रोजगार और बदलाव के असली मुद्दे न दब जाएं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने ज्ञानवापी पर मुस्लिम समाज से भूल स्वीकार करने की अपेक्षा की है। इसे सत्ताधारी दल की सोची-समझी रणनीति के तहत दिया गया बयान माना जा रहा है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल सपा भी इस तरह के बयान देने में पीछे नहीं है। उसके राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा को गढ़े मुर्दे न उखाड़ने की नसीहत दे रहे हैं।
