वाराणसी : (मानवीय सोच) लो फिर आ गया हिंदी दिवस। एक बार फिर हिंदी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाएगा। फिर हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की कसमें खाई जाएंगी। जिनकी मातृभाषा हिंदी है, उनके लिए एक एक सवाल आज ज्यादा मौजूं हो जाता है। क्या सच में हम हिंदी को लेकर वाकई गंभीर हैं। क्या हमारी युवा पीढ़ी हिंदी की वर्णमाला अच्छी तरह से जानती है। इसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए हमने पूर्वांचल में किया एक सर्वेक्षण। इस सर्वेक्षण के परिणाम चौंकाने वाले थे।
60 सेकेंड में हिंदी वर्णमाला नहीं लिख सके विद्यार्थी
सर्वे में प्रत्येक जिले से 5-5 विद्यार्थियों का शामिल किया गया था। सभी से हिंदी वर्णमाला का क से ज्ञ तक 60 सेकेंड में लिखने का कहा गया। इस सर्वेक्षण में 54 फीसदी छात्र-छात्राएं क से ज्ञ तक लिखने में फेल साबित हुए। सिर्फ 46 फीसदी विद्यार्थी ही इसे सही-सही पूरा लिख सके। जिन्होंने इसे पूरी तरह लिखा, उसमें भी कुछ ऐसे थे जिन्होंने ड और ढ जैसे अक्षर के नीचे बिंदी लगाकर उसे ड़ या ढ़ कर दिया।
