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18 नई नगर पंचायतों का होगा गठन

लखनऊ  (मानवीय सोच) नगर निकाय के चुनाव सरकार ने प्रदेश में 18 नई नगर पंचायतों के गठन के साथ ही 20 नगर निकायों के सीमा विस्तार का फैसला किया है। नगर विकास विभाग द्वारा तैयार इससे संबंधित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश में अब नगर निकायों की संख्या बढ़कर 752 हो जाएगी। अब तक प्रदेश में कुल 734 नगर निकाय हैं। इनमें 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 517 नगर पंचायत शामिल हैं।

कैबिनटे के फैसले की जानकारी देते हुए मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के मुताबिक छोटे कस्बों में रहने वाले लोगों को भी शहरी सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से नई नगर पंचायतों का गठन किया गया है। इससे इन कस्बो में रहने वाले लोंगों को भी सहूलित मिलेगी। सरकार के इस फैसले से नगर पंचायतें बनने और सीमा विस्तार वाले कस्बों का शहर की तरह विकास कराया जा सकेगा। साथ ही इन कस्बों में सड़क, पेयजल, सीवर, पथ प्रकाश और पार्क जैसी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राज्य और केन्द्र सरकार की योजनाओं के तहत विकास कार्य कराया जा सकेगा।

प्रस्ताव के मुताबिक प्रतापगढ़, गोंडा और देवरिया में तीन-तीन नई नगर पंचायतों का गठन किया गया है। जबकि गोरखपुर और फतेहपुर में दो-दो नगर पंचायतों का गठन किया गया है। इसके अलावा लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, एटा, आजमगढ़ और संत कबीर नगर में एक-एक कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा जिन 20 नगर निकायों का सीमा विस्तार किया गया है, उनमें 18 नगर पंचायत और दो नगर पालिका परिषद शामिल हैं।

इन 18 नई नगर पंचायतों का होगा गठन
कटरा गुलाब सिंह बाजार, हीरागंज बाजार व गड़वारा बाजार (प्रतापगढ़), भीरा (लखीमपुर खीरी), गैसड़ी (बलरामपुर), खखरेरू व कारीकन धाता (फतेहपुर), तरकुलवा, पथरदेवा व बैतालपुर (देवरिया), मिरहची (एटा), तरबगंज, धानेपुर व बेलसर (गोंडा), मार्टिनगंज (आजमगढ़), हैसर बाजार धनघटा (संत कबीर नगर), उरूवा बाजार व घघसरा बाजार (गोरखपुर)।

इन 20 नगर निकायों का होगा सीमा विस्तार
नगर पंचायत- मलिहाबाद (लखनऊ), सलोन (रायबरेली), महोली (सीतापुर), राजापुर (चित्रकूट), मटौंध (बांदा), पाली (हरदोई), लालगंज, कटरा मेदनी गंज व मानिकपुर (प्रतापगढ़), भगवंत नगर व ऊगु (उन्नाव), सहपऊ (हाथरस), बड़हल गंज (गोरखपुर), महराजगंज व कटघर लालगंज (आजमगढ़), अमिला (मऊ), पचपेड़वा (बलरामपुर), कुरारा (हमीरपुर)।

निकाय चुनाव अब 752 सीटों पर
नई निकायों के गठन के फैसले के बाद प्रदेश में अब कुल 752 नगर निकायों में चुनाव कराया जाएगा। नवंबर में प्रस्तावित निकाय चुनाव को लेकर अब तक 734 निकायों में तैयारियां चल रही थीं। नगर विकास विभाग जल्द ही नई नगर पंचायतों और सीमा विस्तार वाले निकायों में वार्ड गठन के लिए परिसीमन का काम कराएगा।

जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष की आकस्मिक व्यय निधि बढ़ी

योगी कैबिनेट ने जिला पंचायत अध्यक्ष की आकस्मिक व्यय निधि को पांच हजार से बढ़ाकर 25,000 रुपये और क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों की निधि 2500 से बढ़ाकर 5000 रुपये करने की मंजूरी दी है। मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश जिला पंचायत तथा क्षेत्र पंचायत (आकस्मिक व्यय) नियमावली 1972 में संशोधन को मंजूरी दी है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत को गांवों से जुड़े कामकाज के लिए आकस्मिक व्यय की आवश्यकता होती है। आकस्मिक व्यय की राशि बढ़ने से ग्रामीणों को तुरंत मदद दिलाई जा सकेगी।

अब स्वतंत्र रूप से काम करेगा यूपीएसएलडीसी

वितरण कंपनियों को बिजली उपलब्ध कराने वाला उत्तर प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (यूपीएसएलडीसी) अब स्वतंत्र रूप से काम करेगा। राज्य सरकार ने एसएलडीसी को स्वतंत्र इकाई के  रूप में काम करने के लिए हरीझंडी दे दी है। अभी तक एसएलडीसी यूपी पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन के अधीन था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में एसएलडीसी को यूपी पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन से पृथक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
गौरतलब है कि राज्य विद्युत नियामक आयोग ने जुलाई 2020 में विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुसार एसएलडीसी को पृथक कारपोरेट संस्था के रूप में मान्यता दी है।

आयोग ने सरकार को एसएलडीसी को पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन से अलग करके स्वतंत्र रूप से काम करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। पिछले साल आयोग ने अपने टैरिफ आर्डर में भी एसएलडीसी को ट्रांसमिशन कार्पोरेशन से अलग करने को कहा था लेकिन मामला लटका हुआ था। अब सरकार ने एसएलडीसी को ट्रांसमिशन कार्पोरेशन के नियंत्रण से पूरी तरह से मुक्त कर दिया है। एसएलडीसी अब स्वतंत्र रूप से नियंत्रण कक्ष का संचालन करेगा। इससे बिजली की खरीद-फरोख्त से लेकर वितरण तक में पारदर्शिता आएगी। यही नहीं एसएलडीसी अगर भविष्य में सस्ती बिजली खरीदने में कामयाब रहता है तो आम उपभोक्ताओं की दरें भी कम हो सकती हैं।

सरकार के इस फैसले के  बाद एसएलडीसी अब अगले वर्ष से दूसरे बिजली निगमों की तरह नियामक आयोग के समक्ष अलग से अपना वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव दाखिल करेगा। आयोग ने एसएलडीसी के शुल्क एवं प्रभारों के निर्धारण के लिए बाईलॉज अनुमोदित कर दिया है। वितरण कंपनियों, अंतर्राज्यीय ट्रांसमिशन लाइसेंसधारियों, उत्पादन कंपनियों, ओपेन एक्सेस उपभोक्ताओं तथा अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए शुल्क एवं प्रभारों का निर्धारण इन्हीं बाइलॉज के अनुसार होगा। एसएलडीसी अपने वित्तीय रिकार्ड का अलग रख-रखाव करेगा। जानकारों का कहना है कि इससे एसएलडीसी व ट्रांसमिशन कार्पोरेशन के दायित्वों एवं गतिविधियों में अधिक पारदर्शिता आएगी तथा जवाबदेही तय की जा सकेगी।

बुंदेलखंड के हर ब्लॉक में 500 हेक्टेयर में होगी प्राकृतिक खेती

बुंदेलखंड के सात जिलों चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, महोबा और ललितपुर के प्रत्येक विकास खंड (ब्लॉक) में 500 हेक्टेयर भूभाग में प्राकृतिक खेती होगी। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को इसकी मंजूरी दे दी। पहले चरण में प्राकृतिक खेती पर 68.83 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि बुंदेलखंड में सात जिलों के सभी 47 विकास खंडों में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्राकृतिक खेती की कार्ययोजना तैयार की गई है। यहां गो आधारित प्राकृतिक खेती कराई जाएगी। इसके लिए किसानों के 470 क्लस्टर बनाए जाएंगे। एक या दो गांवों को मिलाकर 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल का एक कलस्टर होगा। पहले और दूसरे चरण में 235-235 क्लस्टर का गठन किया जाएगा। एक चरण में 11,750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती कराई जाएगी।

गाय वाले किसानों को मिलेगा योजना का लाभ
इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनके पास अपनी गाय होगी या फिर वह छुट्टा गोवंश में से गाय लेगा। किसी भी गो संरक्षण केंद्र से उसे गाय दे दी जाएगी। इसी के आधार पर वह खेती करेगा। चूंकि प्राकृतिक खेती का आधार ही देशी गाय का गोबर व मूत्र है। इससे जहां मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी, वहीं छुट्टा पशुओं की समस्या भी कम होगी। इसके अतिरिक्त कृषि उत्पादों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। इससे किसानों के आय में वृद्धि होगी। वहीं रासायनिक उर्वरकों का कम प्रयोग होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

चैंपियन फार्मर को मिलेंगे 3000 रुपये प्रतिमाह
प्रत्येक क्लस्टर चुने गए चैंपियन फार्मर को चार वर्ष तक तीन हजार रुपये प्रतिमाह और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन को दो हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। क्लस्टर की अवधि चार साल होगी। प्रोत्साहन के रूप में किसानों को 15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे। पांच साल के लिए इस योजना पर काम करने को मंजूरी दी गई है।

डेलॉयट इंडिया बनाएगी एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की योजना

यूपी को एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाने के लिए डेलॉयट इंडिया को सलाहकार संस्था नियुक्त किया गया है। संस्था पांच वर्ष में एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला प्रदेश बनाने के लिए योजना बनाने और क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को डेलॉयट को सलाहकार संस्था नियुक्त करने के प्रस्ताव मंजूरी दे दी। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने में यूपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्रदेश को एक खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला प्रदेश बनाने के लिए सरकार की ओर से सेक्टरवार कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वर्तमान में विभिन्न देशों की सर्वोत्तम पद्धतियों को अपनाने के लिए सलाहकार की सेवाएं लेने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि सलाहकार संस्था के चयन के लिए 15 मार्च से 5 जुलाई तक चली प्रक्रिया के बाद डेलॉयट इंडिया का चयन किया गया है।

महर्षि सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश-2022 मंजूर

योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश महर्षि सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश-2022 को मंजूरी दी है। अध्यादेश का प्रतिस्थानी विधेयक विधानमंडल के आगामी सत्र में पारित कराया जाएगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि महर्षि सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश-2022 को अधिसूचित करने के बाद महर्षि सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय लखनऊ के नोएडा कैंपस को संचालित करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में आवेदन किया जाएगा। यूजीसी की अनुमति मिलने के बाद विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस का निर्धारित दिशा निर्देश के अनुसार संचालन किया जाएगा। इससे  संस्था में अध्ययनरत विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय से डिग्री मिलने में दिक्कत नहीं होगी। इससे नोएडा कैंपस से शिक्षा प्राप्त कर चुके और अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि  नोएडा कैंपस के संचालन के लिए  शासन से पहले अनुमति नहीं लेने के कारण यूजीसी ने नोएडा परिसर को बंद करने की अपेक्षा की थी। यूजीसी की आपत्ति के कारण संस्था में अध्ययनरत छात्रों को विश्वविद्यालय की ओर से डिग्री देने में दिक्कत हो रही थी।

मुख्यमंत्री फेलोशिप के लिए होगा युवा शोधार्थियों का चयन

प्रदेश के आकांक्षात्मक विकास खंडों में योजनाओं के सर्वेक्षण, अध्ययन जैसे कार्यों के लिए मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम के अंतर्गत शोधार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित शोधार्थी को पारिश्रमिक के रूप में 30 हजार व भ्रमण के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाएगा। टैबलेट क्रय के लिए एकमुश्त 15 हजार रुपये मिलेंगे। इसके अतिरिक्त कोई भुगतान देय नहीं होगा। शोधार्थी की संबद्धता अवधि नियुक्ति की तिथि से एक वर्ष के लिए मान्य होगी। सक्षम स्तर से अनुमोदन पर इसे एक वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सकेगा। कार्यक्रम अवधि के दौरान शोधार्थियों को जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के पर्यवेक्षण में कार्य करना होगा। चयनित शोधार्थी को यथासंभव विकास खंड में ही आवासीय सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।

इससे जुड़ी विस्तृत कार्ययोजना को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह एक पूर्णकालिक कार्यक्रम होगा। इसके अंतर्गत 100 आकांक्षात्मक विकास खंडों के लिए 100 शोधार्थियों का चयन किया जाएगा। शोधार्थी द्वारा तैनाती वाले विकास खंड में योजनाओं का सर्वेक्षण, अध्ययन, प्राथमिक आंकड़ों का संकलन, अनुश्रवण, योजनाओं के संचालन में आ रही चुनौतियों के निराकरण व योजनाओं से जनमानस को अपेक्षित लाभ पहुंचाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए जाएंगे। शोधार्थी द्वारा आकांक्षात्मक विकास खंड में केंद्र, राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का समवर्ती मूल्यांकन कार्य उपजिलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी से समन्वय करके किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को राज्य सरकार के साथ नीति, प्रबंधन, क्रियान्वयन, अनुश्रवण के कार्यों में सहभागिता का विशिष्ट अवसर प्रदान करना है।

इन क्षेत्रों में कार्य कर रहे विद्यार्थी/शोधार्थी होंगे चयनित
– कृषि, ग्रामीण विकास, पंचायतीराज व संबद्ध क्षेत्र।
– वन, पर्यावरण एवं जलवायु
– शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण एवं कौशल विकास
– ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा श्
– पर्यटन एवं संस्कृति
– डाटा साइंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी, आईटीईएस, जैव प्रौद्योगिकी, मशीन लर्निंग डाटा गवर्नेंस आदि।
– बैंकिंग, वित्त एवं राजस्व और लोक नीति एवं गवर्नेंस के अलावा आवश्यकतानुसार अन्य क्षेत्रों पर भी विचार हो सकता है।

अर्हता व आवेदन
चयन के लिए अभ्यर्थियों को नियोजन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। अभ्यर्थियों के पास प्रमुख संस्थानों/विश्वविद्यालयों से प्रथम श्रेणी या न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक अथवा उच्च शैक्षिक योग्यता होनी चाहिए। सूचीबद्ध किसी भी क्षेत्र में प्रासंगिक अनुभव होना चाहिए। उत्कृष्ट कंप्यूटर कौशल व इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी अनुप्रयोगों पर काम करने की क्षमता व संचार कौशल भी हो।

सरकार करेगी फिल्म सम्राट पृथ्वीराज पर एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति

प्रदेश सरकार ने फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को टैक्स फ्री करने के बाद अब इस फिल्म पर दर्शकों द्वारा दिए जाने वाले राज्य माल एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति करने का फैसला लिया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस फैसले केबाद प्रदेश में इस फिल्म के प्रदर्शन पर राज्य माल और सेवा कर की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाएगी।

सरकार के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह फिल्म भारत के महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म में सम्राट पृथ्वीराज के शौर्य और पराक्रम को दर्शाया गया है। साथ ही आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी से युद्ध को दिखाया गया है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म दर्शकों में देश प्रेम एवं मातृभूमि की भावना के प्रति जागरूक करती है। बता दें कि सरकार ने जून में ही इस फिल्म को टैक्स फ्री घोषित किया था। लेकिन एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति से संबंधित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की सहमति के बाद अब मंजूरी दी गई है।

बायलर सेक्शन में अब नहीं होगी दो साल की सजा

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए श्रम विभाग के नियमों में बदलाव किया गया है। बॉयलर सेक्शन में दो साल की सजा खत्म कर दी गई है। अब केवल जुर्माना ही लगाया जाएगा जो एक लाख रुपये होगा। इसके लिए मंगलवार को योगी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

निवेश प्रोत्साहन के उद्देश्य से बायलर्स अधिनियम 1923 से कारावास के प्रावधान को समाप्त करने  के लिए इसकी धारा 24 एवं 25 में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट केसमक्ष रखा गया था। इन धाराओं में नियम था कि न तो बायलर की क्षमता घटाई जा सकती है और न बढ़ाई जा सकती है। विशेष रुप से बायलर रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ खिलवाड़ करने, मसलन उसे कहीं और इस्तेमाल करने या उसी नंबर से कई बायलर चलाने पर सजा का प्रावधान था। अपर मुख्य सचिव सुरेश चंद्रा ने बताया कि इसमें अब सजा नहीं होगी। केवल जुर्माना लगाया जाएगा। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

उत्तराधिकारी के नाम पर अब मात्र 5 हजार में होगा नामांतरण

शहरी क्षेत्र में उत्तराधिकारी के नाम पर संपत्तियों का नामांतरण कराने के लिए किसी व्यक्ति से फीस के नाम पर घालमेल नहीं हो सकेगा। इसके लिए सरकार ने नामांतरण शुल्क मात्र 5000 रुपया निर्धारित कर दिया है। इसी प्रकार लीज होल्ड वाली संपत्तियों का नामांतरण कराने पर संपत्ति की कुल कीमत का एक फीसदी रकम शुल्क के रूप में देना होगा, जबकि अन्य श्रेणी की संपत्तियों के लिए भी सरकार ने पांच श्रेणियां तय कर दी हैं। इससे संबंधित ‘उत्तर प्रदेश नगर नियोजन और विकास (नामांतरण प्रभार का निर्धारण, उदग्रहण और संग्रहण) नियमावली.2022’ को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी गई है।

बता दें कि प्रदेश में अब तक विकास प्राधिकरण के सीमा क्षेत्र में स्थित शहरी संपत्तियों के नामांतरण के लिए कोई नियामवली नहीं थी। इसलिए प्राधिकरणों में मनामाने तरीके से नामांतरण शुल्क लेने का खेल चल रहा था। ऐसा ही एक मामला मुरादाबाद विकास प्राधिकरण से संबंधित था। जिसपर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके बाद से ही नामांतरण के लिए नियमावली बनाने को लेकर विचार-विमर्श हो रहा था। इसी कड़ी में आवास विभाग ने नई नियमावली तैयार की है। इसमें विकास प्राधिकरण की लीज होल्ड और फ्री होल्ड वाली संपत्तियों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं।

नियमावली के मुताबिक लीज होल्ड संपत्ति पर नामांतरण शुल्क उस समय संपत्ति के मूल्य का 1.0 प्रतिशत लिया जाएगा। हालांकि कानूनी उत्तराधिकारी के नाम पर नामांतरण या पंजीकृत बिल के मामले में मात्र 5000 रुपये ही शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा अन्य सभी संपत्तियों जैसे फ्री होल्ड, डीड ऑफ  गिफ्ट आदि के संबंध में डीएम सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति के मूल्य के आधार पर पांच श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। नामांतरण के लिए ऑनलाइन शुल्क 100 रुपये रखा गया है। नई व्यवस्था अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी। यह नियमावली सभी विकास प्राधिकरणों में लागू होगी। संपत्ति एक से अधिक लोगों को बेची जाने पर 25 फीसदी की दर से अतिरिक्त नामांतरण शुल्क लिया जाएगा। नामांतरण शुल्क 10 दिन के अंदर जमा करना होगा।

नई नियमावली में अब संबंधित व्यक्ति को संपत्ति का नामांतरण करने से पहले अखबार में नामांतरण के लिए विज्ञापन निकालने का विकल्प चुनने का भी अधिकार दिया गया है। इससे पहले आवेदक को यह अधिकार नहीं था।

ये है पांच श्रेणियां
डीएम सर्किल रेट के अनुसार        नामांतरण शुल्क

. पांच लाख तक                    1000
. 5 से 10 लाख तक                2000
. 10 से 15 लाख तक              3000
. 15 से 50 लाख तक              5000
. 50 लाख से अधिक              10,000

कोविड के कारण अवरुद्ध हुई विकास परियोजनाओं को पूरा करने में छह महीने का समय और मिलेगा

कोरोना संक्रमण की पहली लहर में लॉकडाउन के कारण अवरुद्ध हुई विकास  परियोजनाओं को पूरा करने में छह माह का अतिरिक्त समय और दिया जाएगा। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को सभी प्रकार की परियोजनाओं को बिना शुल्क समय विस्तारण की मंजूरी देने का प्रस्ताव पारित किया।

औद्योगिक विकास विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक कोविड महामारी के चलते सभी प्रकार की विकास परियोजनाओं को छह महीने का निशुल्क समय विस्तार का प्रावधान है। विभाग के अधिकारी ने बताया कि जिन आवंटियों को 22 मार्च 2020 से पहले लीज डीड जारी हुई है। उन्हें अधिभोग की अनुमति की अवधि 21 मार्च 2021 को पूरी हो रही है।

उनकी अधिभोग अवधि के लिए निर्धारित तिथि में छह महीने का निशुल्क समय विस्तार कर कुल एक वर्ष का समय विस्तार करने का प्रस्ताव मंजूर किया है। उन्होंने बताया कि सभी परिसंपत्तियों और विकास परियोजनाओं में विकासकर्ताओं एवं आवंटियों को अधिभोग के लिए एक वर्ष का समय विस्तार मिलने से कोविड महामारी के कारण रुकी हुई परियोजनाएं पूरी हो सकेगी। इससे आवंटियों की समस्या का समाधान भी होगा।

छह राज्य विश्वविद्यालयों से जुड़े नौ राजकीय महाविद्यालय

कैबिनेट ने प्रदेश के विभिन्न छह राज्य विश्वविद्यालयों के क्षेत्रों में नवनिर्मित व निर्माणाधीन नौ राजकीय महाविद्यालयों को संघटक महाविद्यालय के रूप में संचालित करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही इन महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य शुरू किए जाने को स्वीकृति मिल गई है।

संघटक महाविद्यालय के तौर पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में राजकीय महाविद्यालय जेवर गौतमबुद्धनगर को शामिल किया गया है। वहीं बुंदेलखड विश्वविद्यालय झांसी में राजकीय महाविद्यालय जखौरा ललितपुर व राजकीय महाविद्यालय पाही चित्रकूट को जोड़ा गया है। अन्य में महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली में राजकीय महाविद्यालय हसनपुर अमरोहा, राजकीय महाविद्यालय पूरनपुर पीलीभीत व राजकीय महाविद्यालय फतेहउल्लागंज ठाकुरद्वारा मुरादाबाद को शामिल किया गया है।

वहीं डॉ. भीमराव अंबेडकर आगरा विश्वविद्यालय आगरा के अंतर्गत राजकीय महिला महाविद्यालय नगला चंद्रभान फरह मथुरा को, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के अंतर्गत राजकीय महाविद्यालय पुरवा उन्नाव और लखनऊ विश्वविद्यालय के अंतर्गत राजकीय महिला महाविद्यालय मिश्रिख सीतापुर को संघटक महाविद्यालय के रूप में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप संबंधित विश्वविद्यालय इन संघटक महाविद्यालयों का उपयोग नए संकाय खोलने, शुरू करने के साथ ही बहुआयामी बनाने के लिए कर सकते हैं। साथ ही शिक्षण-प्रशिक्षण के नए क्षेत्र भी शुरू कर सकते हैं, जो विश्वविद्यालय द्वारा वर्तमान में संचालित नहीं किए जा रहे हों।

मनोरंजन कर निरीक्षक संवर्ग मृत घोषित, अब नई भर्तियां नहीं होंगी

राज्य सरकार ने मनोरंजन कर से राज्यकर विभाग में विलय किए गए कर्मियों की सेवा संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रस्तावित आमेलन नियमावली को मंजूरी दे दी है। इससे संबंध में राज्यकर विभाग द्वारा तैयार किए गए ‘मनोरंजन कर विभाग के कर्मचारियों (अधिकारियों, निरीक्षकों और अन्य कर्मचारियों) के सेवा संवर्गों का वाणिज्य कर विभाग में संविलयनकरण नियमावली 2022’ को कैबिनेट में पारित कर दिया गया है। इस नियमावली के लागू होने के बाद मनोरंजन कर निरीक्षक संवर्ग मृत घोषित माना जाएगा, लेकिन इन पदों पर कार्यरत कर्मियों को पदोन्नति और अन्य सेवाओं का लाभ समय-समय पर दिया जाएगा। नियमावली लागू होने की तिथि से इस विभाग से आने वाले कर्मियों की वरिष्ठता भी निर्धारित की जाएगी।

दरअसल एक जुलाई 2017 को प्रदेश में जीएसटी लागू होने के बाद करीब एक साल बाद 24 अप्रैल 2018 को मनोरंजन कर विभाग के निरीक्षकों को छोड़कर अधिकारियों के सभी संवर्गों का विलय राज्यकर विभाग में कर दिया गया था। इसके करीब एक साल बाद निरीक्षकों का भी मर्जर कर दिया गया था, लेकिन राज्यकर विभाग में विलय किए गए अधिकारियों को राज्यकर विभाग के अधिकारियों की तरह प्रोन्नति आदि नहीं मिल पा रहा था। वहीं राज्यकर विभाग में निरीक्षक का पदनाम न होने की वजह से भी दिक्कत आ रही थी।

राज्यकर विभाग में विलय होने के बाद मनोरंजन कर विभाग के कर्मी काम तो करने लगे, लेकिन कई आमेलन नियमावली न होने की वजह से इन अधिकारियों और निरीक्षकों को सेवाओं और पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा था। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में रखे गए प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन कर्मियों के सेवाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। अब ये कर्मचारी वाणिज्य कर कर्मियों की तरह काम करेंगे। मनोरंजन कर विभाग के करीब 270 अधिकारी और कर्मचारी हैं। इस नियमावली केलागू होने से मनोरंजन कर विभाग से आए अधिकारियों और राज्यकर के अधिकारियों की वरिष्ठता सूची एक साथ तैयार हो सकेगी और प्रमोशन का लाभ भी एक समान मिलेगा।

पुलिस विभाग में बदली जाएंगी सवा सौ गाड़ियां

पुलिस विभाग में कंडम हो चुकी सवा सौ गाड़ियां बदली जाएंगी। इसके लिए गृह विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। यह गाड़ियां विभिन्न जिलों के पुलिस मुख्यालय व थानों के साथ-साथ पुलिस की अन्य शाखाओं के लिए होगी। 125 कंडम हो चुकी गाड़ियों की नीलामी होगी और इतनी ही नई गाड़ियां खरीदी जाएंगी।

लखनऊ सहित चार जिलों में खुलेंगे वाणिज्यिक कोर्ट

योगी कैबिनेट ने लखनऊ, मेरठ, आगरा और नोएडा में नए वाणिज्यिक कोर्ट खोलने की मंजूरी दी है। प्रदेश में वर्तमान में 13 वाणिज्यिक कोर्ट संचालित है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि चार नए वाणिज्यिक कोर्ट खोलने से व्यापारियों से जुड़े विवादों का समय पर निस्तारण होगा।

राज्य संपत्ति विभाग के स्टोर कीपरों की प्रोन्नति का रास्ता साफ

लंबे समय से प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे राज्य संपत्ति विभाग के स्टोर कीपर संवर्ग के कर्मियों को अब प्रोन्नति देने का रास्ता साफ हो गया है। उनके संवर्ग की अब अपनी नियमावली होगी। राज्य संपत्ति विभाग द्वारा तैयार की गई ‘उप्र राज्य संपत्ति विभाग, स्टोर कीपर संवर्ग सेवा नियमावली-2022’ को कैबिनेट ने मंजूरी दे ही है। दरअसल समूह ‘ग’ के लिए 1983 में बनी नियमावली में स्टोर कीपर को भी शामिल कर दिया गया था।

इसके बाद 2013 में संशोधित नियमावली बनी थी, लेकिन व्यय वित्त समिति ने स्टोर कीपर संवर्ग को नियमावली से बाहर कर दिया था और कहा था कि समूह ‘ग’ में शामिल सभी पदों के लिए अलग-अलग नियमावली तैयार किया जाए। व्यय वित्त समिति के इस फैसले के बाद राज्य संपत्ति विभाग में सहायक स्टोर कीपर के पद पर नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को प्रोन्नति नहीं मिल पा रही थी। इसी कड़ी में विभाग ने स्टोर कीपर संवर्ग के लिए अलग से सेवा नियमावली तैयार की है। इस नियमावली के लागू होने के बाद सहायक स्टोर कीपर को स्टोर कीपर और वरिष्ठ स्टोर कीपर व स्टोर अधीक्षक के पद प्रोन्नति मिल सकेगी।

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