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18000 रुपए हो आउटसोर्सिंग कर्मियों का मानदेय, नहीं तो आंदोलन

संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इस बात पर चिंता जताई है कि अल्प मानदेय पर तैनात इन कर्मियों को अब जीवन यापन करना कठिन हो रहा है। उन्होंने ऐलान किया कि यदि 30 सितंबर तक इन कर्मियों का न्यूनतम मानदेय 18000 रुपए नहीं किया गया तो इसके बाद बड़ा आंदोलन छेड़ेगे। सेवा शर्तें लागू करे सरकारजेएन तिवारी ने कहा है कि अल्प वेतन पर जीवन गुजार रहे इन कर्मियों के प्रति सरकार का रवैया ठीक नहीं है। एक ही काम के लिए एक कर्मी को बड़ी सैलरी दी जाती है जबकि उसी काम के लिए आउटसोर्सिंग कर्मी को अल्प मानदेय दिया जा रहा है जो कहीं से भी न्यायोचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार तत्कला इन कर्मियों की सेवा शर्तें लागू करे जिससे इनका और इनके परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके। विपरीत हालातों में करते हैं कामअध्यक्ष जेएन तिवारी ने कहा कि गत 11 जून को मुख्यमंत्री से मिलकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को नियमित करने की मांग उठाई थी। नियमित करने में देरी की दशा में 18000 रुपए मानदेय करने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यूनतम मानदेय 18000 रुपए करने पर सहमति जताई थी। पर अभी तक इस दिशा में सरकार की ओर से कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया,

जबकि विपरीत हालातों में ये कर्मी पूरी निष्ठा के साथ सेवाएं दे रहे हैं। शोषण करते हैं सेवा प्रदाताउन्होंने बताया कि आउटसोर्सिंग कर्मी विपरीत परिस्थितियों में काम कर रहे हैं तथा सेवा प्रदाता एजेंसियों के शोषण के शिकार हैं। सेवा प्रदाता एजेंसी मानदेय का मनमाना भुगतान करती हैं और नवीनीकरण के नाम पर हर साल धनउगाही करती है। उन्होंने कहा कि इस बार आउटसोर्सिंग कर्मियों की लड़ाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाएंगे। इस प्रकरण में सूक्ष्म ,लघु मध्यम उद्योग विभाग एवं श्रम विभाग की भूमिका संदिग्ध है। इन विभागों पर सख्ती बढ़ाते हुए कर्मियों के मानदेय पर निर्णय कराए जाने की मांग मुख्यमंत्री से किया है।

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