लखनऊ : (मानवीय सोच) साल था 2000 और जगह लखनऊ का चारबाग रेलवे स्टेशन. एक मासूम बच्ची GRP को लावारिस हालत में मिलती है. ना कोई आगे, ना कोई पीछे. पुलिस वाले बच्ची के पैरेंट्स की खूब तलाश करते हैं लेकिन उनका कहीं पता नहीं चलता. आखिर में मासूम को एक अनाथालय भेज दिया जाता है जहां से दो साल बाद इस बच्ची को एक अमेरिकी महिला गोद ले लेती है और उसे अपने साथ लेकर सात समुंदर पार अपने देश चली जाती है
बच्ची अमेरिका में धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी. इसी बीच उस महिला की मौत हो जाती है, जिसने उसे गोद लिया था. मगर इससे पहले वो बच्ची को हकीकत बता जाती है जिसे सुनकर उसे झटका लगता है और फिर वो शुरू करती है अपने बायोलॉजिकल यानी असली माता-पिता की तलाश. एक नामुमकिन सी लगने वाली तलाश इसी सिलसिले में अब वो करीब दो दशक बाद भारत आई है. आइए सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं इस लड़की की कहानी, खुद उसी की जुबानी
