गोरखपुर : (मानवीय सोच) पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की मुश्किलें कम होती नहीं दिखाई दे रही है. मधुमिता शुक्ला हत्याकांड मामले में जहां उनको हाल ही में रिहाई मिली थी. वहीं अब अपहरण के 22 वर्ष पुराने मामले में वह फंसते नजर आ रहे हैं. कोर्ट के आदेश के बावजूद वह न तो कोर्ट में हाजिर हुए और न ही पुलिस उनको गिरफ्तार कर सकी. इस पर एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि ने पुलिस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अमरमणि की सम्पत्ति को कुर्क करने का आदेश दे दिया है.
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले को लेकर न्यायालय पुलिस पर तीखी टिप्पणी की है और कहा है कि पुलिस सामान्य गरीब अपराधियों के मामले में अपेक्षा से अधिक पैरवी करती नजर आती है, तो वहीं प्रभावशाली दुर्दांत अपराधियों के मामले में किंकर्तव्यविमूढ़ दिखती है. इसी के साथ कोर्ट ने अमरमणि के अधिवक्ता के उस प्रार्थना पत्र को भी निरस्त कर दिया है, जिसमें गिरफ्तारी आदेश को रोकने को लेकर याचना की गई थी. वन्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि के आदेश के बाद खबर सामने आ रही है कि मेडिकल बोर्ड ने जांच के बाद अमरमणि को अवसादग्रस्त बताया है.
