लोकसभा चुनाव, 2024 के नतीजे अब सबके सामने है। चार सौ पार का दम भरने वाली भाजपा को बड़ा झटका लगा है। भाजपा अकेले अपने दम पर बहुमत से 30 सीटें पीछे है। उसे 240 सीटें मिली हैं। हालांकि एनडीए गठबंधन को 291 सीटें मिली हैं और उसने सरकार बनाने का दावा किया है। वहीं, विपक्षी इंडिया गठबंधन 239 सीटों के साथ काफी मज़बूती के साथ उभरा है। इंडिया गठबंधन से भी सरकार बनाने की बातें सामने आ रही हैं। देश की 18वीं लोकसभा में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू और आंधप्रदेश के चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी किंग मेकर बनकर उभरी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा ये भी है कि इंडिया गठबंधन ने नितीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू से संपर्क किया और उन्हें गठबंधन के साथ आने का न्योता दिया है। चुनाव के ये नतीजे देश की राजनीति के लिए बड़ा उलटफेर माने जा रहे हैं। इस बीच अगर हम मुस्लिम राजनीतिक और प्रतिनिधियों के निर्वाचन पर नज़र डालें तो 18वीं लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व घट गया है। 17वीं लोकसभा में जहां 27 मुस्लिम सांसद पार्लियामेंट पहुंचे थे। इस बार 18वीं लोकसभा में 26 सांसद चुने गए हैं। यानी पीएम मोदी के राजनीतिक उत्कर्ष के बीच भी संसद में मुस्लिम प्रतिनिधित्व इस बार से अधिक रहा है। इस बार 18वीं लोकसभा के लिए जो मुस्लिम सांसद चुने गए हैं। उनमें यूपी के कैराना से इक़रा हसन, रामपुर से मोहिबुल्लाह, संभल से ज़ियाउर्रहमान बर्क़, गाज़ीपर से अफ़ज़ाल अंसारी, सहारनपुर से इमरान मसूद शामिल हैं। इस तरह यूपी से पांच मुस्लिम सांसद, संसद पहुंचे हैं। इसके अलावा बंगाल की जंगीपुर से सीट से खलीलउर्रहमान, बिहार के कटिहार से तारिक अनवर, बहरामपुर से क्रिकेटर यूसुफ पठान, मुर्शिदाबाद से अबू ताहिर खान, बहशीरहट से नूरूल इस्लाम, उलूबेरिया से सज्जाद अहमद, माल्दाह दक्षिण से ईशा खान चौधरी एमपी बने।
