वाराणसी : (मानवीय सोच) 30 देशों के 1600 मंदिरों का महासम्मेलन शुरू हुआ। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में इसका शुभारंभ किया। भागवत ने कहा, “हमें गली की छोटी-छोटी मंदिरों की सूची बनानी चाहिए। वहां रोज पूजा हो, सफाई रखी जाए। मिलकर सभी आयोजन करें। संगठित बल साधनों से संपूर्ण करें।
मंदिरों को अपना-उनका छोड़कर एक साथ आगे आएं। जिसको धर्म का पालन करना है वो धर्म के लिए सजग रहेगा। निष्ठा और श्रद्धा को जागृत करना है। छोटे स्थान पर छोटे से छोटे मंदिर को समृद्ध बनाना है। समय आ गया है, अब देश और संस्कृति के लिए त्याग करें।”
‘समाज को एक लक्ष्य में चलाने के लिए मठ-मंदिर चाहिए’
मंदिर हमारी परंपरा का अभिन्न अंग हैं। पूरे समाज को एक लक्ष्य लेकर चलाने के लिए मठ-मंदिर चाहिए। कभी हम गिरे, कभी दूसरों ने धक्का मारा… लेकिन हमारे मूल्य नहीं गिरे। हमारे जीवन का लक्ष्य एक ही है… हमारा कर्म और धर्म। यह लोक भी ठीक करेगा और परलोक भी। हमारे मंदिर, आचार्य, देवस्थान, यति साथ चलते हैं, तभी सृजन के लिए हैं।
