वाराणसी : (मानवीय सोच) विशेष न्यायाधीश अवनीश गौतम की अदालत ने 35 साल पुराने प्रकरण में मऊ जिले के रतनपुरा विकास खंड के तत्कालीन सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) रामअग्रे सिंह को तालाब की खुदाई कराए बगैर श्रमिकों का फर्जी मस्टररोल तैयार कर भुगतान के मामले में दोषी पाया है। अदालत ने दोषी को सात वर्ष की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
अभियुक्त रामअग्रे सिंह गाजीपुर जिले के नंदगंज का रहने वाला है और अब सेवानिवृत्त हो चुका है। प्रकरण के मुताबिक, वर्ष 1987-88 में तत्कालीन बलिया जिले के विकास खंड रतनपुरा (अब जनपद मऊ में) के नगवा गांव में खंड विकास अधिकारी विजय प्रताप सिंह, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) रामअग्रे सिंह और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, प्रखंड बलिया के अवर अभियंता दयाराम यादव ने लोकसेवक के पद पर रहते हुए ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत 18 हजार रुपये का व्यय तालाब खुदाई के लिए किया।
