‘देश में सब आपकी जय-जयकार कर रहे हैं। आपने हिंदुस्तान के लिए इतना बड़ा अचीवमेंट किया है। देश का नाम रोशन किया है। दुनिया को भी महसूस कराया है। पैरा ओलिंपिक में इस उपलब्धि के लिए कोच को नमन करने का मन करता है, क्योंकि वो आपकी साइकोलाजी को जानते हैं। क
‘पैरा ओलिंपिक के कोच के पास एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी टैलेंट होता है। आपके कोच का बहुत बड़ा रोल है। आपने 10-0 से धमाकेदार मैच जीतकर ब्रॉन्ज मेडल जीता है। मन में गर्व होता है,
जब आप जैसे नौजवान, देश का नाम रोशन करते हैं। आपके पिता ने कड़ी मेहनत करके आपको यहां तक पहुंचाया और इतना बड़ा परिणाम दिया। बहुत-बहुत बधाई।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बातें पैरा ओलिंपिक के ब्लाइंड जूडो में देश को पहला पदक दिलाने वाले कपिल परमार से फोन पर बातचीत के दौरान कही। कपिल परमार और उनके कोच मुनव्वर अली अंजान का लखनऊ से जुड़ाव है। परमार की ट्रेनिंग हजरतगंज के हलवासिया अकादमी में हुई है। दैनिक भास्कर ने पैरा ओलिंपिक में ब्रांज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले कपिल परमार और उनके कोच मुनव्वर अली अंजान से खास बातचीत की। पढ़ें पूरा इंटरव्यू।
इस तस्वीर में पैरा ओलिंपिक ब्रांज मेडल विनर कपिल परमार अपने कोच मुनव्वर अली अंजान को सम्मानित कर रहे हैं। पहले पढ़ें पेरिस में मौजूद कपिल परमार से फोन पर हुई बातचीत सवाल: दिव्यांग होने पर आम तौर पर लोगों का झुकाव खेलों की तरफ नहीं होता? आपने कैसे खेलना शुरू किया? जवाब: मैं एसिडेंटली ब्लाइंड हूं। 2009-10 में हाई वोल्टेज करंट लगा था, उससे रोशनी चली गई। हाथ फट गए थे और सिर, गले, गर्दन में दिक्कत थी। घर पर खेत के पास मोटर चलाने गया था।
मुझे पता नहीं चला कि वहां पर गीला था। करंट लगा तो तो होश नहीं था। अस्पताल में 6 महीने भर्ती रहा। 4 महीने ICU में भर्ती रहा। कुछ समय के लिए कोमा में चला गया था। सवाल: फिर कैसे सुधार हुआ और कैसे उस हादसे से उबरकर आगे बढ़े? जवाब: जब कुछ आराम मिला तो डॉक्टर ने कहा कि घूमो, टहलो, चलना-फिरना शुरू करो। इसके बाद भाईयों और साथियों के साथ ग्राउंड पर जाना शुरू किया। कबड्डी, खो-खो खेलने लगा।
फिर दंगल जाने लगे तो पैसे भी मिलने लगे। डॉक्टर से ब्लाइंड सर्टिफिकेट बनवाया। शुरू में 60 फीसदी का बना, फिर एम्स से सर्टिफिकेट बनवाया। इसके बाद कोच मुनव्वर अली अंजान से मिला। वहीं से मेरी शुरुआत हुई। सवाल: कोच से कैसे मिले? क्या हुआ था? जवाब: पैरा जूडो के सर से मेरी मुलाकात 2017-18 में हुई।
एक नेशनल इवेंट में मुलाकात हुई थी। सर से बोला था कि ब्लाइंड हूं, तो वहीं से बात शुरू हुई। पहला ट्रायल दिया तो हार गया। इसके बाद नेशनल में गोल्ड मेडल जीता। सर ने फिर से मौका दिया और लंदन कॉमनवेल्थ गेम्स 2019 में गोल्ड मेडल जीता था। 2021 में कजाकिस्तान में ग्रैंड पिक्स में पहला मेडल देश के लिए आया था। उसी समय से सर के साथ लगातार जुड़ा रहा।
