गाजीपुर : (मानवीय सोच) करीमुद्दीनपुर रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थापित नागेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां सावन मास में दूरदराज से आकर लोग शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। इस स्थल का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है। बताते हैं कि पहले यहां तक राजा नल का राज्य होता था।
ऊंचाडीह स्थिति शिवलिंग के इतिहास के बारे में पुजारी नर्वदेश्वर मिश्र बताते हैं कि 400 साल पहले जंगल में आसपास के चरवाहे अपनी पशुओं को लेकर आते और छोड़कर चले जाते। शाम को सभी पशु वापस चले जाते। लेकिन, कुछ दिन से उन पशुओं में एक ऐसी गाय थी, जो वापस नहीं आती। चरवाहे ने पता किया तो जानकारी हुई कि वह जंगल में बैठीं रहती है।
ये प्रक्रिया कुछ दिन चलने के बाद शाम को चरवाहे जिज्ञासा वश उस स्थान पर पहुंचे तो देखा गाय एक झाड़ में खड़ी थी और उसके थन से सारा दूध स्वत: निकल रहा था। उस झाड़ में चरवाहे ने देखा तो धरती से निकला हुआ शिवलिंग दिखाई दिया। शिवलिंग के अगल-बगल कुछ सर्प भी बैठे थे, तभी से इनका नाम नागेश्वर महादेव पड़ा।
