नोएडा (मानवीय सोच) एक सर्वे में नोएडा के 86 % निवासियों ने कहा है कि उनकी कॉलोनियों या सोसाइटियों में अतिक्रमण देखने को मिलता है।
श्रीकांत त्यागी मामला और अतिक्रमण
श्रीकांत त्यागी विवाद का मूल कारण अतिक्रमण ही था। जब श्रीकांत त्यागी के ही सोसाइटी की महिला ने उसके द्वारा किए गए अतिक्रमण का विरोध किया था तब त्यागी ने उस महिला के साथ बदतमीजी की थी। इस मामले के बाद अतिक्रमण को लेकर लोकलसर्किल ने नोएडा में एक सर्वे किया।
सर्वे में क्या आया सामने
लोकलसर्किल के सर्वे में यह बात सामने आई है कि अतिक्रमण का मामला सिर्फ मलिन बस्तियों, निम्न-आय वाली कॉलोनियों या कस्बों तक ही नहीं सीमित है बल्कि उच्च वर्ग और समाज के तथाकथित अमीर कहे जाने वाले लोगों के इलाकों में भी अतिक्रमण जैसी चीजें देखीं जा रहीं हैं।
सर्वे में कुल 2000 लोग शामिल
इस सर्वे में कुल 2000 लोगों को शामिल किया गया। जिनमें से 61 % पुरुष और 39 % महिलाएं हैं। सर्वे में यह सामने आया कि नोएडा के कुल 86 % इलाकों में अतिक्रमण की समस्या है।
सर्वे में नोएडा में रह रहे लोगों ने कहा कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन को हर महीने कॉलोनियों और सोसाइटियों में हो रहे अतिक्रमण की जानकारी नोएडा प्राधिकरण को देनी चाहिए।
लोकलसर्किल के सर्वे में यह सामने आया है कि नोएडा प्राधिकरण को अगर अतिक्रमण की जानकारी समय पर मिल जाएगी तो वह अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस कदम उठा पाएगी। सनद रहे कि श्रीकांत त्यागी के अतिक्रमण की जानकारी जैसे ही नोएडा प्राधिकरण को मिली वैसे उसने उचित कदम उठाया।
सर्वे में शामिल लोगों का दावा
नोएडा के कुछ लोग जो इस सर्वे में शामिल थे उन्होंने यह भी दावा किया है कि नोएडा प्राधिकरण के कुछ अधिकारी भी अक्सर दोषी होते हैं।
लोकलसर्किल के संस्थापक सचिन टापरिया ने कहा कि नोएडा कि यह समस्या नोएडा प्राधिकरण के माध्यम से खत्म किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तो इस उत्तर प्रदेश के बाकी शहरों में भी लागू किया जा सकता है।
