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IIT दिल्ली ने मनुष्यों में SARS-CoV-2 के विकास तंत्र का किया अध्ययन

नई दिल्ली (मानवीय सोच)  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के शोधकर्ताओं ने मनुष्यों में सार्स कोव-2 (SARS-CoV-2) के विकास की प्रक्रिया का अध्ययन किया है। इस अध्ययन के माध्यम से कोविड-19 बीमारी के विकास, प्रतिरक्षा तंत्र से बचने की वायरस की क्षमता और उसके स्वरूपों के उत्पन्न होने की गुत्थी सुलझाने में मदद मिल सकती है।

सात सदस्यीय रिसर्च टीम के अनुसार, वायरस के जीनोम में ‘सीपीजी’ संख्या वायरस के रूप बदलने की क्षमता, प्रतिरक्षा तंत्र से बचाव और बीमारी पैदा करने की वायरस की काबिलियत से जुड़ी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि सार्स कोव-2 जीनोम से सीपीजी कम होने की दर, मानव शरीर में वायरस के विकास होने के कुछ महीनों के बाद तेजी से कम होती है।

SARS-CoV-2 में एक यूरैसिल-समृद्ध (यूरेसिल आरएनए के चार बिल्डिंग ब्लॉक्स में से एक है) जीनोम है। शोधकर्ताओं ने पहचाना है कि कैसे सीपीजी से सटे यूरैसिल सार्स-सीओवी-2 जीनोम से सीपीजी के नुकसान में योगदान करते हैं।

आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर मनोज मेनन ने कहा कि हमारी रिसर्च, वायरस और मानव शरीर के बीच होने वाली जटिलताओं के लिए भविष्य के अध्ययन की आवश्यक रूपरेखा तय करती है, जिसके कारण सीपीजी कम होती है।

उन्होंने कहा कि हमने 17 करोड़ से ज्यादा मानव संक्रमण में महामारी के पहले 17 महीने के दौरान सार्स कोव-2 जीनोम में सीपीजी के घटने का अध्ययन किया।

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