गोरखपुर (मानवीय सोच) गीताप्रेस गोरखपुर के स्वर्ण जयंती समारोह में आरपीएफ बैंड द्वारा राष्ट्रगान की प्रस्तुति के बाद ट्रस्टी की ओर से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया गया। इसके बाद रामचरित मानस ग्रंथ का विमोचन हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को गुजराती भाषा में पुस्तक भेंट की। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गीता प्रेस जिसने विगत 100 वर्षों में करोड़ों पुस्तकों का प्रकाशन कर उल्लेखनीय कार्य किया है। राष्ट्रपति के इस कार्यक्रम में आने पर उनका अभिनंदन करता हूं।
देश के शायद ही ऐसा कोई परिवार हो जिसके यहां गीता कोई पुस्तक न हो। 100 साल पहले गोयनका जी ने गीता प्रेस का जो बीज बोया था वो आज पूरे विश्व में फैला है। पुस्तकों में व्याकरण की कितनी शुद्धि है इसको पुस्तक देख के अंदाजा लगाया जा सकता है। एक समय ऐसा था कि कल्याण पुस्तिका का लोग महीनों इंतजार करते थे, लेकिन अब तकनीक के माध्यम से छपते ही लोगों के घर पहुंच जा रहा है। गीता प्रेस का मुख्य द्वार का उद्घाटन करने देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद जी यहां पधारे थे और आज शताब्दी वर्ष में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के सपूत और वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी पधारे हैं। गीता प्रेस जब अपनी 125 वीं जयंती मना रहा होगा तो देश आजादी का शताब्दी वर्ष मना रहा होगा।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि गीता प्रेस समाज को आदर्श और लोगों को नैतिक बनाने का काम कर रहा है। घर घर गीता और रामचरित मानस पहुंचाने में गीता प्रेस की बड़ी भूमिका है। इस मौके पर गीताप्रेस से जुड़े लालमणि तिवारी ने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कल्याण पुस्तिका के नियमित पाठक हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं मानता हूं कि पिछले जन्म के कुछ पुण्य कर्म हैं जो आज मुझे गीता प्रेस के शताब्दी समारोह में शामिल होने का अवसर मिला। गीता प्रेस के कर्मचारियों की निष्ठा और उनका अनुशासन अद्भुत है। उनकी जितनी प्रशंसा की जाए वो कम है। लीला चित्र मंदिर को जिसने भी रेखांकित किया है वो निश्चित ही कोई देव ही होगा। गीता प्रेस को आगे ले जाने में हनुमान जी की कृपा अर्थात हनुमान प्रसाद पोद्दार जी कृपा है। गीता प्रेस, प्रेस नहीं बल्कि साहित्य का मंदिर है। मुझे यहां आकर खुशी हुई की यहाँ महिलाओं और बेटियो को सभी से ऊंचा स्थान दिया।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं इस बात की सराहना करता हूं की आध्यात्मिक प्रचार के लिए गीता प्रेस का अहम योगदान है। उन्होंने गीता के श्लोक का उल्लेख किया। कहा कि इस प्रेस का मुख्य उद्देश्य है भक्ति का प्रचार प्रसार है। गीता प्रेस सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में विख्यात हो चुका है। सस्ते दर पर लोगों को धार्मिक पुस्तकें उपलध कराने के लिए मैं ट्रस्ट का आभारी है। मैं कल्याण का नियमित पाठक हूं और ये मुझे हर महीने समय से मिल जाती है। यहां भ्रमण करने पर मुझे लगा कि ये यात्रा अधूरी है। ऐसे में मैं यहां एक बार और आना चाहूंगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि गीता प्रेस केवल प्रेस नही, बल्कि दर्शनीय स्थल भी है। गीता प्रेस देश के बाहर भी अपनी शाखाएं खोलने की तैयारी कर रहा है। मेरा सचिवालय गीता प्रेस को अन्य देशों में स्थापित करने में सहयोग करेगा।
