अहमदाबाद (मानवीय सोच) गुजरात में 2002 में हुए दंगों के सिलसिले में एसआईटी के हलफनामे के बाद कांग्रेस के दिवंगत नेता अहमद पटेल पर आरोप लगे हैं। दरअसल, एसआईटी ने तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया है कि अहमद पटेल ने तब की बीजेपी सरकार को गिराने की साजिश के लिए सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को 30 लाख रुपये दिए थे।
एसआईटी के इस दावे पर अब अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता के नाम में अभी वजन है, इसीलिए विपक्ष उनके नाम का इस्तेमाल कर रहा है।
I guess his name @ahmedpatel still holds weight to be used for political conspiracies to malign d opposition.Why during UPA years @TeestaSetalvad was not rewarded & made Rajya sabha membr & why the center uptil 2020 did not prosecute my father for hatching such a big conspiracy ?
— Mumtaz Patel (@mumtazpatels) July 16, 2022
साथ ही उन्होंने पूछा कि अगर आरोप सही हैं तो तीस्ता सीतलवाड़ को यूपीए की सरकार में राज्यसभा सांसद क्यों नहीं बनाया गया? उन्होंने यह भी पूछा कि 2020 तक आखिर इस सरकार ने इतने बड़े साजिश की जांच क्यों नहीं करवाई?
वहीं, कांग्रेस ने एसआईटी की ओर से दिवंगत नेता अहमद पटेल के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं और 2002 के मामले में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक ‘व्यवस्थित रणनीति’ का हिस्सा बताया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान जारी कहा, ‘कांग्रेस दिवंगत अहमद पटेल के खिलाफ गढ़े गए आरोपों को पुरजोर तरीके से खारिज करती है। यह प्रधानमंत्री की उस व्यवस्थित रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह 2002 में उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान हुई सांप्रदायिक सामूहिक हत्या को लेकर किसी भी जिम्मेदारी से खुद को बचाना चाहते हैं।’
साथ ही रमेश ने कहा, ‘प्रधानमंत्री की राजनीतिक प्रतिशोध वाली मशीन उन लोगों को भी नहीं छोड़ती जो उनके राजनीतिक विरोधी रहे और अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह एसआईटी अपने राजनीतिक आकाओं की धुन पर नाच रही है और उसे जो कहा जाएगा वही करेगी। हम जानते हैं कि पहले के एक एसआईटी प्रमुख को राजनयिक जिम्मेदारी से नवाजा गया क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘क्लीन चिट’ दी थी।”
उन्होंने दावा किया, ”न्यायिक प्रक्रिया के चलने के दौरान अपनी कठपुतली एजेंसियों के जरिए अनर्गल आरोप लगाकर प्रेस के माध्यम से फैसला सुनाना मोदी-शाह की तरकीबों की वर्षों से पहचान रही है। यह मामला कुछ नहीं बल्कि इसी की एक मिसाल, बस इतना है कि एक दिवंगत व्यक्ति को बदनाम किया जा रहा है जो ऐसे सरेआम बोले जा रहे झूठ को खारिज करने के लिए उपलब्ध नहीं हो सकते।”
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस संक्रमण के बाद पैदा हुई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण पटेल का 25 नवंबर, 2020 को निधन हो गया था।
