मिर्जापुर (मानवीय सोच) पतित पावनी गंगा के तट पर स्थित होने की वजह से पंचमुखी महादेव श्रावण के महीने में भक्तों के आस्था के केंद्र हैं। लगभग चार सौ वर्ष प्राचीन पंमुखी महादेव का विग्रह नेपाल के काठमांडू के विख्यात पशुपतिनाथ के स्वरूप का विग्रह है। पवित्र श्रावण मास में नगर के बरिया घाट स्थित अति प्राचीन पंचमुखी महादेव धर्म संस्कृति के साथ शिव भक्ति-भाव के अनन्य वाहक हैं। आस्था और विश्वास के प्रतीक पंचमुखी महादेव के विग्रह की स्थापना नेपाली बाबा ने अपने हाथों से की है। बताते हैं नेपाल के नेपाली बाबा जगत जननी मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने के लिए लगभग चार सौ वर्ष पहले आए। माता विंध्याचल के श्रीचरणों में शीष झुका आशीर्वाद लिया। माता के दर्शन के बाद उनके मन में नेपाल के पशुपतिनाथ महादेव की तरह विंध्यक्षेत्र में पशुनाथ महादेव का विग्रह स्थापना की जिज्ञासा पैदा हुई।
बरिया घाट रामलीला समिति के महांत्री अक्षबरनाथ केशरवानी बताते हैं नेपाली बाबा पशुपतिनाथ के विग्रह के लिए सोच विचार में डूबे ही थे कि इसी बीच अचानक उनकी मुलाकात नगर के प्रसिद्ध व्यवसायी बसंत लाल से हुई। नेपाली बाबा ने बसंत लाल से अपनी इच्छा प्रकट की। बाबा के विचार सुनते ही बसंत लाल उन्हें बरियाघाट ले गए। तब खाली और गढ्ढे वाला स्थान दिखाते हुए उन्हें मंदिर निर्माण कर शिव लिंग की स्थापना के लिए प्रेरित किया। नेपाली बाबा ने भी बिना देरी किये मंदिर निर्माण में लग गए। कुछ समय बाद प्राचीन कला और संकृति से युक्त आकर्षक एवं भव्य मंदिर बन कर तैयार हो गया।
अद्भुत प्राच्यकला का नमूना है मंदिर
पंचमुखी महादेव मंदिर की दीवारों से लेकर प्राचीर पत्थरों की नक्काशी,उकेरी गईं कलाकृतियां प्रस्तर कला के अद्भुत नमूना हैं। जिन्हें देखने मात्र के भक्त के मन में भक्ति भाव स्वयमेव पैदा हो जाता है।
चारों द्वार पर नंदी करते हैं महादेव की रखवाली
पंचमुखी महादेव के साथ गर्भगृह में श्रीगेणश जी, माता-पार्वती, जगत के पालनहार भगवान विषुण और अर्धकाली माता की मूर्ति विराजमान हैं। मुख्य मंदिर के चार दरवाजे हैं,मुख्य द्वार से गर्भगृह में प्रवेश द्वार पर बड़ी नंदी महाराज तो शेष तीन दरवाजों पर छोटे नंदी विराजमान हैं।
पंचमुखी गायत्री माता भी हैं विराजमान
शिव शक्ति व भक्ति की आभा से दैदीप्यमान पंचमुखी महादेव परिसर में पंचमुखी गायत्री माता, पंचमुखी मंदिर के गर्भगृह से अलग लगभग 36 वर्ष पहले मानस मंदिर में श्रीराम-जानकी, पवनपुत्र हनुमान जी के साथ विराजमान हैं। साथ ही पंचमुखी हनुमान जी, मंदिर के बाहर भैरो जी,वीरभद्र जी मंदिर की रखवाली के लिए मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर विराजमान हैं।
