शिवसेना के बागी सांसद राहुल शेवाले बोले, 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए उद्धव चेहरा नहीं

मुंबई   (मानवीय सोच) शिवसेना के बागी नेता राहुल शेवाले ने गुरुवार को कहा कि उद्धव ठाकरे 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए जिताऊ चेहरा नहीं थे, इसलिए उनके लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गठबंधन करना जरूरी हो गया था। बीते मंगलवार को लोकसभा में पार्टी के नेता नामित किए गए शेवाले ने कहा कि शिवसेना में विभाजन से पहले उन्होंने आगामी आम चुनाव को लेकर नेतृत्व का मुद्दा कई बैठकों में उद्धव के समक्ष उठाया।

शेवाले ने कहा, ‘मैंने ठाकरे के साथ एक बैठक के दौरान लोकसभा चुनाव के लिए नेतृत्व का मुद्दा उठाया, जिसमें संजय राउत भी मौजूद थे। राउत ने चुनावी चेहरे के रूप में ठाकरे की ओर संकेत किया। मैंने उनसे कहा कि हम ठाकरे का सम्मान करते हैं, लेकिन हमें यथार्थवादी होना होगा। वह लोकसभा चुनाव का चेहरा नहीं हो सकते।’

शेवाले ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस के साथ शिवसेना के गठबंधन से मामला और भी जटिल हो गया,क्योंकि ये पार्टियां कई निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिद्वंद्वी हैं। शेवाले ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा, जो उनके कार्यकर्ताओं के लिए स्वीकार्य नहीं होगा। शेवाले और 11 अन्य लोकसभा सदस्यों ने रुख बदलते हुए अब शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के प्रति अपनी निष्ठा जताई है।

शिवसेना में बड़े पैमाने पर विद्रोह के कारण ठाकरे के पद छोड़ने के बाद 30 जून को शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था। शेवाले ने जोर देकर कहा कि बड़ी संख्या में शिवसेना के नेता भाजपा के साथ गठबंधन के पक्ष में हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अगला लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।

उन्होंने कहा कि आम चुनाव को लेकर चर्चा के दौरान एक अहम लोकसभा सीट राकांपा को देने के लेकर शिवसेना नेता असुरक्षित महसूस करने लगे। शेवाले ने कहा, ‘शिवाजीराव अधलराव पाटिल, जो शिरूर सीट से राकांपा के अमोल कोल्हे से हार गये थे, को पुणे लोकसभा सीट छोड़ने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि मवाल सीट पर शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बार्ने ने जीत दर्ज की लेकिन इसे पूर्व मुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को देने की पेशकश की गई।

शेवाले ने एक बार फिर दोहराया कि उद्धव ठाकरे शिवसेना-भाजपा गठबंधन को पुनर्जीवित करने के इच्छुक थे और उन्होंने पिछले साल जून में दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री मोदी के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की थी। शेवाले ने शिवसेना के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच सुलह से इंकार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में बालाकोट हवाई हमले जैसी कोई घटना होती है, तो राष्ट्रवाद का उदय हो सकता है। उनके मुताबिक उद्धव ठाकरे के पार्टी का नेतृत्व करने और शिंदे को सरकार के नेता के रूप में पेश करने का भी प्रस्ताव था, लेकिन यह काम नहीं आया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *