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राजनीतिक पार्टियों की मुफ्त वाली योजनाओं पर लगेगी लगाम!

नई दिल्ली  (मानवीय सोच)   सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों को मुफ्त में उपहार देने से रोकने के लिए समाधान खोजने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।

बता दें, मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहारों की घोषणाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने तीन मार्च को आपत्ति जताई थी, जिस पर याचिकाकर्ता ने याचिका को वापस ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही इस नई याचिका पर विचार करने से इनकार दिया था, लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त घोषणाओं का मामला उसके समक्ष पहले से ही लंबित था।

सुप्रीम कोर्ट ने अश्वनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका पर 25 जनवरी को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद हिन्दू सेना संगठन के उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह यादव ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त घोषणाएं करने का मुद्दा उठाया।

सपा-कांग्रेस और आप को बनाया गया पक्षकार

याचिका में सपा, कांग्रेस और आप आदि कुछ दलों को पक्षकार बनाया गया। कोर्ट से मुफ्त घोषणाएं करने वाले दलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। याचिका में कहा गया कि मुफ्त घोषणाएं प्रलोभन हैं। ये  जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (1) में भ्रष्टाचार के दायरे में आती हैं।

मुफ्त घोषणाओं को करने वाले दलों के उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने की मांग

याचिका में मांग की गई है कि जिन दलों ने मुफ्त घोषणाएं की हैं उनके उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया जाए। इतना ही नहीं, उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का चुनाव आयोग को आदेश दिया जाए। क्योंकि इनकी पार्टी मतदाताओं को प्रलोभन दे रही है।

यह मामला जैसे ही सुनवाई पर आया और याचिकाकर्ता के वकील वरुण कुमार सिन्हा ने बहस शुरू करनी चाही तभी तीन सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस एनवी रमना ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम तीनों का मानना है कि यह याचिका किसी खास उद्देश्य से दाखिल की गई है। यह याचिका प्रेरित है। इसके पीछे कोई छिपा हुआ उद्देश्य है।

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