लखनऊ (मानवीय सोच) बिजली चोरी के मामलों में समय पर एफआईआर दर्ज न किए जाने पर बिजली थानों के अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इस प्रवृत्ति पर नाराजगी जताते हुए सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को समय पर एफआईआर दर्ज न करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इस संबंध में स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य कौशल किशोर शर्मा व वीके श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने यह आदेश दिया कि 24 घंटे में बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज हो जानी चाहिए। ऐसा न होने पर जिम्मेदार अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बिजली कंपनियों की तरफ से नियामक आयोग में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि इस आदेश के उल्लंघन पर 1882 अभियंताओं को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
आयोग में रखे गए आंकड़ों के अनुसार पिछले 5 वर्षों में बिजली चोरी के 3,22,970 मामले सामने आए। इसमें 1,02,270 मामलों में 24 घंटे के बाद एफ आईआर दर्ज हुई। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिसमें अभियंताओं ने बिजली थानों में समय से एफआईआर के लिए आवेदन दे दिया गया था, लेकिन समय पर एफ आईआर दर्ज नहीं की गई। आयोग ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए बिजली कंपनियों के एमडी को समय पर एफआईआर दर्ज न होने के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करके इसकी रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
उधर, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बिजली चोरी के मामलों में अभियंताओं व पुलिस की जवाबदेही तय हो सकेगी।
