लखनऊ (मानवीय सोच) इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हाईकोर्ट में गत एक अगस्त को की गई सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति में दखल देने से इनकार कर दिया है। इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने स्वयं ही कहा कि वे हालिया सूची के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने आगे किसी प्रकार की सूची जारी करने पर रोक लगाने की याचिकाकर्ताओं की मांग ठुकरा दी है।
यह आदेश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय व जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की पीठ ने अधिवक्ता रमा शंकर तिवारी आदि की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर पारित किया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए।
कोर्ट ने सुनवाई के बाद, राज्य सरकार से कहा कि वह छह हफ्ते में बताए कि सरकारी वक़ीलों की नियुक्ति की क्या प्रक्रिया है। कोर्ट प्रमुख सचिव विधि को इस केस में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
