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पीएचडी में कोर्सवर्क और दो शोधपत्र प्रकाशित करना अनिवार्य

कानपुर  (मानवीय सोच)  सीएसजेएमयू से पीएचडी करने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए कोर्सवर्क अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, सभी शोधार्थियों को कम से कम दो शोध पत्र प्रकाशित कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। ये शोध पत्र यूजीसी केयर, स्कोपस या एससीआई जर्नल्स में प्रकाशित होना चाहिए। यह फैसला सोमवार को विद्या परिषद की बैठक में हुआ।
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अगुवाई में बैठक में नए विषयों, कक्षाओं के संचालन से लेकर पीएचडी पाठयक्रमों के नियमों के बारे में फैसला लिया गया।नए सत्र में प्रवेश लेने वाले सभी शोधार्थियों को संबंधित विषय में निर्धारित क्रेडिट के साथ पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा पास करनी होगी। प्रकाशित शोध पत्र शोधार्थी की ओर से किए जा रहे अनुसंधान कार्य से संबंधित एवं मौलिक होने चाहिए। हाइब्रिड माध्यम से बैठक में प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, डीन प्रशासन प्रो. सुधांशु पाण्डिया, रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार यादव, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंजनी कुमार मिश्र, सीडीसी निदेशक डॉ. आरके द्विवेदी, डॉ. विशाल शर्मा रहे।

डिजिटल ह्यूमैनिटीज और एनालिटिक्स होगा पाठ्यक्रम का हिस्सा
विवि कैंपस में अध्ययनरत सभी छात्रों के लिए डिजिटल ह्यूमैनिटीज और एनालिटिक्स पाठ्यक्रम को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा। स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज की सहायक आचार्य डॉ. अंशु सिंह को इस पाठ्यक्रम की रूपरेखा के साथ-साथ इसके संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। शुरुआत में यह पाठ्यक्रम वैल्यू एडेड कोर्स की तर्ज पर संचालित किया जाएगा।

ये भी हुए मुख्य फैसले:
-कैंपस के सभी पाठ्यक्रम के छात्रों को आईआईटी कानपुर की मदद से डाटा साइंस और ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पढ़ाया जाएगा।

-विवि के शोधार्थी राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी व सम्मेलन के लिए यात्रा भत्ता व आर्थिक मदद की जाएगी। इसे पं. मदन मोहन मालवीय के नाम से शुरू किया गया है।
-पीएचडी करने वाले रेगुलर शोधार्थियों को दस हजार रुपये की फेलोशिप दी जाएगी।

-यूजीसी के मानकों के मुताबिक शोधार्थियों को विवि से संबद्ध कॉलेजों में शिक्षण कार्य में शामिल किया जाएगा।
-विवि से संबद्ध कॉलेजों में पढ़ाने वाले शोधार्थियों को 25 हजार रुपये स्टाइपेंड के रूप में दिया जाएगा।

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