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वाराणसी में तो दो तिहाई होटलों और गेस्ट हाउसों के पास फायर की एनओसी नहीं

लखनऊ  (मानवीय सोच)   होटल लेवाना में सोमवार की भोर जानलेवा अग्निकांड के बाद पूरी यूपी में होटलों, गेस्ट हाउस आदि की जांच पड़ताल शुरू हो गई है। प्रदेश शासन ने सभी छोटे-बड़े होटलों, गेस्ट हाउस और लॉजों में आग से बचाव संबंधी प्रबंधों की पड़ताल करने का निर्देश जारी किया है। वाराणसी में 1200 से अधिक होटल-लॉज हैं, उनमें 974 के पास फायर ब्रिगेड की एनओसी नहीं है। कुछ बड़े और मध्यम स्तर के होटल ही इस बाबत सचेत हैं। घाटों के किनारे की गलियों और घनी आबादी में बने इन होटलों के लग्जरी सुईट कब आग का गोला बन जाएं, ‘शिव भोला’ ही जानते होंगे।

फायर फाइटिंग सिस्टम ही नहीं 

गंगा घाटों के किनारे के 300 से ज्यादा होटलों, गेस्ट हाउस में ज्यादातर के प्रवेश द्वार के पास फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं है। दशाश्वमेध, शिवाला, अस्सी, सोनारपुरा, गंगामहल घाट, दरभंगा घाट, मानमंदिर घाट, गोदौलिया, बड़ादेव, बांसफाटक इलाकों में कई होटल में फायर फाइटिंग सिस्टम के प्रति लापरवाही दिखती है।

प्रवेश व निकास द्वार एक, ट्रेनिंग भी नहीं 

‘हिन्दुस्तान’ की पड़ताल में कुछ होटलों में आग बुझाने वाले सिलेंडर दिखे लेकिन वे दो-तीन साल से सिर्फ टंगे हैं। उनका नवीनीकरण नहीं हुआ है। कई होटलों, गेस्ट हाउस में प्रवेश और निकास द्वार एक ही हैं। तीन होटलों के कर्मचारियों ने माना कि उन्हें सिलेंडर का इस्तेमाल करना नहीं आता। आग से बचाव के लिए रिंग पाइप पानी टंकी से जुड़ी होनी चाहिए जबकि उसका जुड़ाव टंकी से नहीं मिला।

सरल होनी चाहिए एनओसी की प्रक्रिया

बनारस होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष गोकुल शर्मा ने कहा कि फायर ब्रिगेड से एनओसी लेने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। कुछ प्रावधानों को सरल किया जाना चाहिए। इससे पर्यटन सेक्टर को राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि 25-30 साल पुराने होटलों में नए नियमों के अनुसार जांच करना अव्यावहारिक है।

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