लखनऊ (मानवीय सोच) श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुनील भराला की शिकायत पर शासन ने समिति का गठन करते हुए जांच करने के निर्देश दिए हैं। भराला ने मुख्य सचिव से शिकायत की थी कि गाजियाबाद में आवास विकास परिषद ने सहकारिता समितियों को जमीन देने में भारी खेल किया।
भराला ने पत्र देकर यह आरोप लगाया था कि यह पूरा खेल कई कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए आवास विकास परिषद ने सपा नेताओं के कहने पर किया। इसमें आवास विकास परिषद ने सहकारिता समितियों को तय मानक से ज्यादा जमीन दी। इसके लिए पांच सहकारी समितियों को मोहरा बनाया गया।
मामूली शुल्क के बदले में गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार में लाखों वर्ग मीटर जमीन का आवंटन इन समितियों को किया गया। मार्केट रेट के हिसाब से यह जमीन एक हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की है जो इन समितियों को कौड़ियों में आवंटित कर दी गई। जमीन मिलते ही यहां केवल समिति सदस्यों के लिए नहीं बल्कि इससे कई गुना ज्यादा फ्लैट का निर्माण शुरू कर दिया गया। इस खेल में एक ग्रुप की 12 कंपनियां वजूद में आईं। ये सब बोगस कंपनियां हैं जो सिर्फ आपस में व्यापार करती हैं।
भराला का कहना है कि जो लैंड पुलिंग पॉलिसी 2016 तक यूपी में बनी ही नहीं थी, उसी को आधार बनाकर आवंटन कर दिया गया। करीबन 200 करोड़ की जमीन तो बिना किसी शुल्क, बिना किसी रजिस्ट्री स्टांप ड्यूटी के ही सिद्धार्थ विहार में दी गई। उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर जांच कराने की मांग की। भराला ने बताया कि इस प्रकरण में शासन ने मेरठ मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है।
