लखनऊ (मानवीय सोच) वायरल बुखार ने कोहराम मचा रखा है। हर दूसरे घर में कोई न कोई सदस्य वायरल की चपेट में है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज मेडिसिन व बाल रोग विभाग की ओपीडी में आ रहे हैं।
बुखार से मरीज तप रहे हैं। तेज बुखार संग सर्दी-जुकाम ने भी मरीजों को जकड़ रखा है। केजीएमयू मेडिसिन विभाग की ओपीडी में बुखार व दूसरे वायरल बीमारियों से पीड़ित होकर 100 से अधिक मरीज आ रहे हैं। बाल रोग विभाग की ओपीडी में 30 से 40 बुखार पीड़ित बच्चे पहुंच रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में 150 से अधिक बुखार व वायरल पीड़ित ओपीडी में सोमवार को आए। यही हाल सिविल अस्पताल के मेडिसिन व बाल रोग विभाग का रहा। यहां भी 140 से अधिक वायरल फीवर के मरीज पहुंचे। लोकबंधु अस्पताल की ओपीडी में 80 से अधिक मरीज बुखार, सर्दी-जुकाम के पहुंचे। लोहिया संस्थान में यह आंकड़ा 110 के करीब था।
ओपीडी में अफरा-तफरी
सप्ताह के पहले दिन अस्पतालों की ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज पहुंच गए। इससे ओपीडी में अफरा-तफरी मच गई। केजीएमयू में पर्चा बनाने के लिए चार से अधिक काउंटर चल रहे थे। इसके बावजूद मरीजों को ओपीडी पंजीकरण के लिए आधे घंटे से ज्यादा का वक्त लग रहा था। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि 5120 मरीज ओपीडी में पहुंचे। सभी मरीजों को इलाज मुहैया कराया गया। बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी के मुताबिक सोमवार को 5431 मरीज ओपीडी में देखे गए। सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपी सिंह के मुताबिक 5212 नए पुराने मरीजों को ओपीडी में देखे गए। लोहिया संस्थान में 3000 से अधिक मरीज ओपीडी में देखे गए। लोकबंधु अस्पताल में मरीजों का दबाव देखने को मिला।
वायरल होने पर तरल पदार्थ अधिक लें
बलरामपुर अस्पताल में मेडिसिन विभाग के डॉ. विष्णु कुमार के मुताबिक बुखार की दशा में पूरी तरह आराम करें। जब तक ठीक नहीं हो जाते, गर्म और तरल भोजन, जैसे सूप और खिचड़ी खाएं। तेज बुखार और शरीर में दर्द हो रहा हो, तो अपने डॉक्टर को फौरन दिखाएं।
हैंड-फुट माउथ का प्रकोप
लखनऊ में बच्चे हैंड-फुट, माउथ संक्रमण की चपेट में आ रहे है। इस वायरल संक्रमण की चपेट में सबसे ज्यादा 10 साल से छोटे बच्चे आ रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष वर्मा ने बताया कि बच्चे के गले के भीतर, पैर व हाथ में छाले बन रहे हैं। बच्चों को तेज बुखार दो से तीन आ रहा है। इसमें बच्चा खाना-पानी सब छोड़ रहा है। कमजोरी की वजह से बच्चे को चलने-फिरने में भी दिक्कत हो रही है। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों का आईसोलेशन रखने की सलाह दी जा रही है। क्योंकि यह वायरल इंफेक्शन तेजी से फैलता है। यदि किसी स्कूली बच्चे में यह लक्षण नजर आ रहे हैं तो उसे आईसोलेट करें। स्कूल भेजने से बचें।
वायरल फीवर के लक्षण
-ठंड लगना
-सिर दर्द
-कंपकंपी
-खांसी, गले में खराश
-शरीर में दर्द
-भूख में कमी
-जोड़ों के पास दर्द होना
-शरीर में दाने निकलना
-चेहरा में सूजन व उल्टियां होना।
ये बरतें सावधानी
-साबुन से हाथ को समय-समय पर धोएं
-भीड़-भाड़ से दूर रहें
-बिना हाथ धोए अपना चेहरा, मुंह और नाक छूने से बचें।
-वायरल बुखार होने पर खांसी, जम्हाई या छींक आए अपना मुंह रुमाल से ढंक लें।
