लखनऊ (मानवीय सोच) प्रदेश में स्थाई डीजीपी की नियुक्ति के लिए प्रदेश सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की आपत्ति के बाद स्थाई डीजीपी को लेकर पेंच फंस गया है। गृह विभाग एक ओर जहां रविवार के दिन भी आयोग की ओर से लगाई गई आपत्ति का जवाब तलाशता नजर आया वहीं सरकार की ओर से पूर्व डीजीपी मुकुल गोयल की कमियां गिनाई जाती रहीं।
सूत्रों का कहना है कि यूपीएससी की ओर से लगाई आपत्ति का जवाब तैयार करने केलिए विधिक राय भी ली जा रही है, ताकि आयोग में प्रदेश सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से जल्द से जल्द आयोग को जवाब भेजा जाएगा ताकि 30 सितंबर से पहले आयोग में बैठक हो सके।
दर असल मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान को पूर्णकालिक डीजीपी बनने के लिए जरूरी है कि आयोग मुकुल गोयल को डीजीपी के पद से 2 वर्ष पूरा होने से पहले हटाए जाने के फैसले के राज्य सरकार के जवाब से संतुष्ट हो जाए। इसके बाद राज्य सरकार के प्रस्ताव के दिन को ही आधार मानकर प्रदेश के नए डीजीपी के लिए नाम तय करे।
ऐसा होता है तो जीएल मीणा और डॉ. आरपी सिंह छह माह से कम कार्यकाल बचा होने के कारण रेस से बाहर हो जाएंगे और डीएस चौहान की राह आसान हो जाएगी। वहीं डीजीपी के लिए बैठक के लिए 30 सितंबर के बाद की तिथि निर्धारित करता है और बैठक की तिथि को आधार मानता है तो ऐसी स्थिति में डीएस चौहान के पूर्णकालिक डीजीपी बनने की राह बहुत मुश्किल हो जाएगी।
